उधमपुर/पंचैरी। जिले में ओवरलोडिंग की समस्या खत्म होती नजर नहीं आ रही है। गांव से लेकर शहर तक की सड़कों पर दौड़ लगाती गाड़ियों में धड़ल्ले से ओवरलोडिंग जारी है। स्कूल-कॉलेज खुलने के बाद तो समस्या पहले से भी गंभीर हो चुकी है। जानकारी होने के बावजूद ट्रैफिक पुलिस व यातायात विभाग की तरफ से इस पर लगाम लगाने को लेकर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
जिला उधमपुर में हर रोज सैकड़ों की संख्या में यात्री वाहन यात्रियों की आवाजाही का कार्य करते हैं। इन वाहनों में ज्यादातर वाहनों में दिन दहाड़े ओवर लोडिंग की जा रही है। उधमपुर से पंचैरी, मोंगरी, थाती, गंडाला, लड्डन पावर हाउस, चक, मुत्तल, कघोट, जगानू, तलपड़, धनाल, चनुनता, जोनू, क्रिमची, मानसर व अन्य कई ऐसे रूट मौजूद है, जिनमें हर रोज ओवर लोडिंग देखने को मिल रही है। जब तक यह वाहन शहर के दायरे में चल रहे होते हैं तब तक ओवर लोडिंग वाहन के अंदर ही होती है, लेकिन जैसे ही वाहन शहर के दायरे से बाहर होता है फिर वाहन की छत भी यात्रियों से भर जाती है। कई बार तो चालक पुलिस की कार्रवाई की परवाह किए बिना शहर में भी ओवर लोडिंग कर रहे हैं।
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सुबह व शाम के समय ज्यादा हो रही ओवर लोेडिंग
सबसे अधिक ओवर लोडिंग सुबह व दोपहर के समय देखने को मिल रही है। सुबह के समय ग्रामीण इलाकों से विद्यार्थियों ने स्कूल-कालेज पहुंचना होता है तो वहीं सरकारी कर्मचारियों को अपने कार्यालय। समय पर पहुंचने के चक्कर में विद्यार्थी व कर्मचारी ओवरलोडिंग की परवाह किए बिना वाहनों की छतों पर सवार हो जाते हैं। यही सब घर जल्दी पहुंचने के प्रयास में दोपहर के समय भी होता है।
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हादसे के बाद कुछ समय के लिए जागा था प्रशासन व पुलिस
पांच जून को डीसी कार्यालय के पास तेज रफ्तार में मेटाडोर के पलटने पर तीन लोगों की मौत के बाद जिला प्रशासन व पुलिस ने ओवर लोडिंग पर अंकुश लगाने के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किए थे। कुछ दिनों तक एआरटीओ और पुलिस ने वाहनों के चालान भी काटे। लेकिन अब फिर से हालात पहले जैसे ही बन चुके हैं। ग्रामीण इलाकेे में ओवर लोडिंग धड़ल्ले से जारी है।