बेरहम मौसम ने एक बार फिर कहर बरपाया। रविवार को हर तरफ जोरदार बारिश के साथ आेले गिरने से जनजीवन पटरी से उतर गया।
इतना ही नहीं पहाड़ की चोटियों पर तो बर्फबारी हुई ही, चिनैनी और किश्तवाड़ कसबे में भी रात करीब साढ़े आठ बजे बर्फबारी शुरू हो गई। भद्रवाह कसबे में भी बर्फ के फाहे गिरे। इसके साथ ही ठंडी हवा ने ठिठुरन बढ़ा दी।
इस बीच खैरी में फिर ताजा भूस्खलन हो गया। इसके कारण उधमपुर-श्रीनगर राजमार्ग एक बार फिर बंद हो गया। संभाग के तीन जिले डोडा, रामबन, किश्तवाड़ भी संपर्क मार्ग से टूट गए।
हजारों गाड़ियां हाईवे पर फंस गई। लगातार गिर रहे मलबे के कारण खैरी गांव की काफी जमीन मलबे में धंस गई। सारा दिन सेना और ग्रेफ के लोग मलबा हटाने के काम में लगे रहे।
हालात ऐसे बने हैं कि एक सप्ताह में मात्र दो दिन ही हाईवे खुल पाया। जिला हेडक्वार्टर आने के लिए लोगों को पैदल तीन चार किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ा। पहाड़ी से पैदल चलकर कई लोग स्टेशन और जिले में पहुंचे।
शनिवार रात को हुई मूसलाधार बारिश के कारण सुबह तड़के खैरी की पहाड़ियां से भूस्खलन होना शुरू हो गया। एसएसपी ट्रैफिक हाईवे संजय कोतवाल के अनुसार हाईवे को खोलने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है।
ग्रेफ और सेना की टीमें काम में जुटी हैं। खैरी में सड़क का एक हिस्सा भी दब गया है। पहाड़ी को काटा जा रहा है। मलबा लगातार नीचे आ रहा है। सैकड़ों टन मलबे को हटाने में समय लग रहा है।
उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि वह मौसम खराब होने की वजह से अपने ठिकानों से नहीं निकले। जम्मू से जो गाड़ियां सुबह घाटी के लिए रवाना हुई हैं।
उन फंसी गाड़ियों को पहले निकालने का प्रयास किया जा रहा है। बारिश का असर माहौर के ग्रामीण व पहाड़ी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा देखा गया। यहां बर्फबारी भी हुई। इलाके में संपर्क मार्गों की हालत खस्ता है। जिला मुख्यालय से अरनास व माहौर के लिए जाने वाले मार्ग पर पस्सियां गिरने से अक्सर बंद रहता है।