उधमपुर। जिला उधमपुर के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में हजारों किसान बंदरों के आतंक से त्रस्त हैं। बंदरों ने 2011-12 वर्ष में खेतों में आतंक मचाकर किसानों को करीब 877.67 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया। नुकसान का आंकड़ा देखने के बाद कृषि विभाग ने किसानों को वैसी फसल लगाने की नसीहत दे रहा है, जो बंदर नहीं खाते। दरअसल, नुकसान का आंकड़ा बेहद चिंताजनक है और बंदरों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है। ऐसी स्थिति में किसानों को खुद फसल की बचाव के लिए सोचना पड़ेगा।
जिला उधमपुर के ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर गांववासी कृषि पर निर्भर हैं। मौसम के मेहरबान होने पर फसल अच्छी होगी तो किसान चैंन की नींद सोते हैं। अगर फसल अच्छी नहीं होगी तो उनकी नींद उड़ जाती है। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों से किसानों की नींद मौसम के बजाए बंदरों ने उड़ा रखी है। करीब दस वर्ष पहले ग्रामीण इलाकों में बंदरों ने दस्तक दी थी। शुरुआत में बंदर मामूली रूप से फसल को नुकसान पहुंचाते थे, लेकिन, जैसे-जैसे बंदरों की संख्या में बढ़ोतरी होती गई, वैसे-वैसे नुकसान भी बढ़ता गया। मौजूदरा समय में जिले के 11 कृषि जोन में सौ से ज्यादा गांव बंदरों के आंतक की चपेट में हैं। ये बंदर हर वर्ष किसानों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिब, चढ़ेई, मुत्तल, मजालता कघोट अमरोह और अन्य कई ग्रामीण इलाकों में तो हालात इतने गंभीर हो चुके है कि कुछ किसानों ने खेती करने से परहेज करना शुरू कर दिया है।