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Udhampur News: जिले की 236 पंचायतों में से 67 हुईं टीबी मुक्त

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उधमपुर। जिला टीबी अस्पताल में मरीजों के टेस्ट की जांच करता कर्मचारी।
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- आठ स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच के लिए मशीनें स्थापित की गई हैं
परवेज खान

उधमपुर। जिले को टीबी मुक्त बनाने के स्वास्थ्य विभाग के प्रयास रंग ला रहे हैं। कुल 236 पंचायतों की बात करें तो 2024 तक 67 पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं। 2025 में विभाग की ओर से शेष पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने का प्रयास जारी है। लगातार शिविर का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
2023 में जिले में टीबी के मरीजों की संख्या लगभग एक हजार थी। 2024 अप्रैल से मार्च 2025 तक यह संख्या घटकर 972 रह गई है। 406 मरीज अस्पताल से निशुल्क दवा लेकर अपना कोर्स पूरा कर स्वस्थ हो चुके हैं जबकि अन्य मरीज लगातार दवा लेकर घरों पर ही स्वस्थ हो रहे है। 2023 की तुलना में अप्रैल 2024 से मार्च 25 तक टीबी के मामलों में कमी देखने को मिली है। विभाग ने दूरदराज व ग्रामीण क्षेत्रों में बने स्वास्थ्य सेंटरों में टीबी की जांच के लिए मशीनें भी लगाई हैं। ताकि समय पर बीमारी का पता चल सके और पीड़ित उपचार शुरू करवा सके। जिले के आठ सेंटरों पर टीबी टेस्ट के लिए मशीनें उपलब्ध हैं।
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टेस्टों की संख्या बढ़ने से सामने आए मरीज

स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी से पीड़ित लोगों की पहचान के लिए पीएचसी बसंतगढ़, सीएचसी चिनैनी, एसडीएस रामनगर, पीएचसी मजालता, जीएमसी उधमपुर, जिला टीबी अस्पताल, पीएचसी टिकरी, पीएचसी घोरड़ी में मशीनें लगा दी गई हैं ताकि इन सेंटरों में आकर लोग बीमारी की जांच करवा सकें। 2023 में विभाग की ओर से एक लाख की आबादी के पीछे करीब तीन हजार मरीजों के टेस्ट किए गए। 2024 में टेस्टों की संख्या को बढ़ाकर 4500 कर दी गई।



लक्षण

- दो हफ्ते से ज्यादा बलगम वाली खांसी
- रात में पसीना आना
- लो ग्रेड बुखार रहना
- वजन कम होना
- भूख कम लगना



निशुल्क दवा और डाइट के लिए मिलते हैं पैसे

स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी से पीड़ित मरीज के निशुल्क इलाज के साथ-साथ उसके खाने-पीने के लिए नवंबर 2024 से पहले पांच सौ रुपये प्रति माह दिया जाता था। मौजूदा समय में इस राशि को सरकार ने बढ़ा दिया है। मौजूदा समय में एक हजार रुपये प्रति मरीज को डाइट के लिए दिया जा रहा है।
तंबाकू व शराब का सेवन मुख्य कारण

मौजूदा समय में जिले में अभी तक के टीबी के मामलों पर गौर किया जाए तो इनमें ज्यादातर वो मरीज शामिल हैं जो शराब व तंबाकू का अधिक सेवन करते हैं। इससे उनके फेफड़ों में समस्या आ गई और वह टीबी के शिकार हो गए। हुए है। दूसरी ओर मधुमेह से पीड़ित 13 लोग भी टीबी के शिकार हुए हैं।
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कोट....

जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। 2023 की तुलना में 2024 व मार्च 2025 तक टीबी के मरीजों में काफी कमी आई है। टेस्टिंग को बढ़ाया गया है। टीबी की बीमारी अलग-अलग प्रकार की होती है। किसी में छह महीने का कोर्स करना होता है तो किसी मरीज को डेढ़ साल तक दवाई खानी पड़ती है। मरीज कोर्स पूरा करे तो पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है।
- डॉ. अनिल सलोच, इंचार्ज, जिला टीबी अस्पताल
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