संविधान में शिक्षा और रोजगार को हर नागरिक का बुनियादी अधिकार बताया गया है। बेगार काम करवाना गैरकानूनी है। इसके बाद भी 57 माह से सिंचाई विभाग के डेलीवेजर बिना पगार मिले, बेगार काम करने को मजबूर हैं। यही हाल अन्य सरकारी विभागों में कार्यरत सैकड़ों डेलीवेजरों का है।
वेतन न मिलने और स्थायी न किए जाने से नाराज डेलीवेजरों ने सोमवार को रैली निकालकर सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियाें ने सात साल का कार्यकाल पूरा कर चुके तमाम डेलीवेजरों को पक्का करने और उनका कई महीनों का बकाया वेतन जारी करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे सड़क पर उतर आएंगे। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
पीएचई, इरीगेशन सहित अन्य सरकारी विभागों में कार्यरत डेलीवेजरों ने सोमवार को आल जेएंडके लो पेड इंप्लाइज फेडरेशन के प्रधान ईशर दास सांगड़ा के नेतृत्व में नगर में रैली निकालकर सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सात साल का कार्यकाल पूरा कर चुके तमाम डेलीवेजरों को पक्का करने और उनका पिछले कई वर्षों से बकाया वेतन का भुगतान करने की मांग कर रहे थे।
सांगड़ा ने बताया कि सरकार ने बाकायदा कर्मचारी यूनियनों के साथ हुए समझौते में यह फैसला किया था कि सात साल के कार्यकाल के बाद सभी डेलीवेजरों को पक्का कर दिया जाएगा। लेकिन, आज कई साल गुजर जाने के बाद भी डेलीवेजर पक्का होने का इंतजार कर रहे हैं। यही नहीं, उन्हें आज तक कभी भी उनका वेतन समय पर नहीं दिया गया। इरीगेशन विभाग में कार्यरत डेलीवेजरों को तो पिछले 57 महीनों से वेतन नहीं मिला है। पीएचई विभाग के डेलीवेजरों को भी वेतन मिले छह साल से अधिक का समय हो गया है।
इरीगेशन विभाग अपने डेलीवेजरों को तयशुदा 4500 महीने के स्थान पर केवल 4350 रुपये ही पगार दे रहा है। यह आज के महंगाई के दौर बहुत कम है। इसके अलावा उन्होंने सरकार से प्रदेश में सातवें वेतन अयोग की सिफारशों को जल्द लागू करने की भी मांग की। मुलाजिमों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे सड़क पर उतर आएंगे।