जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से हर साल औषतन 48 बोतल खून को यूं ही फेंक दिया जाता है। वह या तो एक्सपायर हो चुका होता है या फिर हिमोलाइज्ड होता है। बर्बाद होने वाले खून में पाजिटिव ग्रुप के भी शामिल होते हैं। इससे साफ होता है कि खून लेने वालों की सही तरीके से पहले जांच नहीं की जाती है।
दरअसल, सूचना के अधिकार के तहत आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट संजीत कुमार बवोरिया ने एडीसी से जानकारी मांगी थी कि 01 जनवरी 1997 से 31 मार्च 2016 तक जिला अस्पताल में कितने बोलत नेगेटिव ग्रुप या एक्सपायरी खून को नष्ट किया गया है।
इस पर प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि 4 अप्रैल 2001 से लेकर 31 मार्च 2016 तक जिला अस्पताल में कुुल 22781 बोतल खून प्राप्त हुआ। इसमें से 721 बोतल खून को नष्ट किया गया।