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घुसपैठियों की नई चाल: भारत में एंट्री से पहले बदल दी जाती है पहचान! घुसपैठ नेटवर्क का पूरा 'इकोसिस्टम' बेनकाब

Wed, 29 Jul 2026 12:27 PM IST
Nikita Gupta अभिषेक राज अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर

सार

सुरक्षा एजेंसियों की जांच में संकेत मिले हैं कि संगठित नेटवर्क अवैध घुसपैठ से पहले बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को भारत के अलग-अलग राज्यों के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश के अनुरूप ढालने का प्रयास करते हैं।
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भारत में घुसपैठ से पहले नई पहचान की ट्रेनिंग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नेटवर्क की जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसियों के सामने नया पैटर्न उभरकर आया है, जिसने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जांच में पता चला है कि भारत में घुसपैठ कराने वाले संगठित नेटवर्क बांग्लादेशियों को केवल सीमा पार कराने तक सीमित नहीं हैं। यह उन्हें भारत के अलग-अलग राज्यों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवेश के अनुरूप ढालने का भी प्रयास करते हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार संदिग्धों से पूछताछ, रिपोर्ट और नेटवर्क की गतिविधियों की जांच में यह संकेत मिले हैं कि अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। इसी इनपुट के आधार पर एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में भी जांच को आगे बढ़ाना शुरू किया है।

पश्चिम बंगाल से दिल्ली व जम्मू-कश्मीर तक नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, किराये के मकान दिलाने, मोबाइल सिम उपलब्ध कराने, बैंक खाते खुलवाने और रोजगार उपलब्ध कराने तक का संगठित नेटवर्क सक्रिय है। इनके तार पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर तक जुड़े पाए गए हैं। 
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राज्य के अनुसार बदल जाती है पहचान
घुसपैठ कराने वाले नेटवर्क का उद्देश्य बांग्लादेशियों व रोहिंग्या को स्थानीय आबादी के अनुसार ढालना होता है। कोशिश होती है कि ये आसानी से घुल-मिल जाएं। यदि किसी व्यक्ति को उत्तर प्रदेश या दिल्ली में बसाने की योजना होती है, तो उसे वहां की बोलचाल, उच्चारण, पहनावे और सामाजिक व्यवहार के अनुरूप तैयार करने का प्रयास करते हैं।

n इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति को जम्मू क्षेत्र में बसाना हो तो उसे डोगरी बोलचाल के सामान्य शब्द, स्थानीय अभिवादन, खान-पान की आदतें, पहनावे की शैली तथा स्थानीय समाज में सामान्य रूप से स्वीकार्य तौर-तरीकों से परिचित कराते हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में दाढ़ी और मूंछ रखने के तरीके तक पर सलाह दिए जाने के संकेत मिले हैं ताकि पहचान को लेकर संदेह कम हो।

तो जम्मू इसलिए है महत्वपूर्ण
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जम्मू क्षेत्र लंबे समय से विभिन्न राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों का केंद्र रहा है। इसी कारण बड़ी आबादी के बीच नए लोगों का मिल जाना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। जांच एजेंसियां इसी पहलू का अध्ययन कर रही हैं कि क्या अवैध नेटवर्क ने इस सामाजिक परिस्थिति का फायदा उठाने की भी कोशिश की।
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