सोशल मीडिया पर निरंजन कुमार का कहना है कि देश के खिलाफ बोलने वालों के लिए तिरंगे के नीचे कोई जगह नहीं है। महबूबा और अब्दुल्ला तालिबानी झंडे के नीचे अपनी जिंदगी बिता सकते हैं। इन दोनों ने शुरू से आतंक के सिर पर चढ़कर सरकार बनाई है और इन्हें आतंकियों की सरकार ही पसंद है।
आरूषा राठौड़ का कहना है कि इस देश में क्या हो रहा है हिन्दू दलित मुस्लिम करके खुद हिन्दू से लड़ रहा है, मुसलमान शरिया, सुन्नी मुस्लिम करके अपने आप से लड़ रहे है ओर जो नफरत की राजनीति करने वाले हैं, वो इस आग में अपनी रोटियां सेंक रहे है, आज लोगो को आपसी सामंजस्य की बेहद जरूरत है।
नव्यांजलि का कहना है कि आप (पैक्सटन की महबूबा) और आपका परिवार तालिबान के तहत "सुशासन" का आनंद लेने के लिए भारत छोड़कर अफगानिस्तान में क्यों नहीं बस जाते। यह 100% हलाल प्रमाणित सरकार है।
द थर्ड आई नाम से एक यूजर ने कहा है कि देशद्रोही हमेशा देशद्रोही है। इसमें कोई शक नहीं। मैं अनुरोध करूंगा @नरेंद्र मोदी से कि वह महबूबा मुफ्ती को अफगानिस्तान भेज दें। ताकि वह तालिबान शासन के तहत अफगान महिलाओं के अधिकारों के लिए रास्ता और मदद/लड़ाई का नेतृत्व कर सके।
सिवाराम प्रतापा का कहना है कि मेरा अनुरोध है @ महबूबा मुफ्ती जी से कि वह काबुल के लिए उड़ान भरें और तालिबान के साथ अपने प्रशासन के अनुभव को साझा करें। वैसे भी वो आज़ाद है और कश्मीर में इंटरव्यू देने के अलावा कुछ काम नहीं है उनके पास।