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महबूबा मुफ्ती की बेटी के तल्ख तेवर: हेलमेट पर फलस्तीनी झंडा लगाकर आया बल्लेबाज, एक्शन पर आग बबूला हुईं इल्तिजा

Fri, 02 Jan 2026 09:46 PM IST
विकास कुमार पीटीआई, श्रीनगर

सार

इल्तिजा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों में निराशा का माहौल है। उन्होंने कहा कि वीपीएन पर प्रतिबंध और बोलने की आजादी न होने के कारण वे स्वतंत्र रूप से अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं।
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पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू और कश्मीर में एक स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान एक क्रिकेटर द्वारा अपने हेलमेट पर फलस्तीनी झंडा लगाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना के बाद, जम्मू और कश्मीर पुलिस ने मामले में प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि फलस्तीन की स्थिति पर बात करने में कोई बुराई नहीं है।

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इल्तिजा मुफ्ती का समर्थन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर
इल्तिजा मुफ्ती, जो पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी भी हैं, ने क्रिकेटर फुरकान उल हक का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि फलस्तीन के हालात के बारे में बात करना गलत नहीं है और कहा कि लोगों को स्वतंत्र रूप से बोलने की आजादी होनी चाहिए। उन्होंने पश्चिमी देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी गाजा में हो रही मौतों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होते हैं। इल्तिजा मुफ्ती ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में लोगों को छोटी-छोटी बातों पर परेशान किया जा रहा है और वीपीएन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लग रहा है।

राजनीतिक विचारधाराओं पर टकराव
जब उनसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई कि वे जम्मू-कश्मीर में हमास की विचारधारा को पनपने नहीं देंगे, तो इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि भाजपा को भी यहां अपनी हिंदुत्व विचारधारा चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी को भी "जय श्री राम" या "भारत माता की जय" जैसे नारे लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कश्मीरी छात्रों और शॉल विक्रेताओं पर हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में हमले हो रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में निराशा का माहौल
इल्तिजा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों में निराशा का माहौल है। उन्होंने कहा कि वीपीएन पर प्रतिबंध और बोलने की आजादी न होने के कारण वे स्वतंत्र रूप से अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं। उन्होंने वर्तमान सरकार पर भाजपा के एजेंडे को लागू करने का आरोप लगाया और मुख्यमंत्री पर अनुच्छेद 370 के बजाय केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की बात करने का इल्जाम लगाया।
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बिजली टैरिफ वृद्धि और चुनावी वादों का उल्लंघन
बिजली टैरिफ में किसी भी सामान्य वृद्धि न होने के मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिजली की दरों में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में टैरिफ में 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन इलाकों में मीटर लगे हैं, वहां भी बिजली उपलब्ध नहीं है और ऐसे में आम कश्मीरी नागरिक ₹3,000 मासिक बिल का भुगतान कैसे कर पाएगा, जबकि उसकी दैनिक आय ₹300 से ₹500 है। इल्तिजा ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करना चाहिए था, जैसे कि 200 यूनिट बिजली मुफ्त देना। उन्होंने प्रीपेड मीटर लगाने की भी आलोचना की और कहा कि यह केवल कुछ धनी परिवारों के लिए संभव है, न कि आम नागरिकों के लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कड़ाके की सर्दी के दौरान बिजली और राशन भी उपलब्ध नहीं कराया है, और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने सभी वादे तोड़े हैं।
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