कश्मीर में अधिक बारिश वाले क्षेत्र भी सूखे
घाटी के सभी जिलों में गंभीर कमी दर्ज की गई। श्रीनगर में 81%, बडगाम में 80%, गांदरबल में 77% बारिश कम हुई। उत्तरी कश्मीर में जहां सर्दियों में ज्यादा बारिश होती है वहां भी बहुत कम बारिश हुई। बांदीपोरा में 45%, बारामुला में 72% और कुपवाड़ा में 49% बारिश कम हुई। दक्षिण कश्मीर में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां कुलगाम में 93%, शोपियां में 91%, पुलवामा में 77% और अनंतनाग में 80% बारिश कम हुई। जम्मू क्षेत्र में कठुआ में चौंकाने वाली 99% की कमी है। डोडा में 94%, रामबन में 87%, उधमपुर में 94% और सांबा में 98% की कमी रही। जम्मू में 91% की कमी है। सिर्फ पुंछ में 42% की तुलनात्मक रूप से कम कमी देखी गई।
स्थानीय के साथ वैश्विक कारण कर रहे प्रभावित
मौसम विज्ञानी और मौसम विभाग के निदेशक मुख्तार अहमद के अनुसार इस असामान्य परिवर्तन के पीछे स्थानीय और वैश्विक कारण हैं। ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव किस से छिपा नहीं है। उसके अलावा पश्चिमी विक्षोभ को छोड़ दें तो सामान्य बारिश और बर्फबारी नहीं हुई। कश्मीर में कोहरे की कमी है। इससे भी मौसम ड्राई महसूस हो रहा है। दिन में बढ़े तापमान ने भी परेशानी बढ़ाई है। अनियंत्रित विकास और पेड़ों के नुकसान की भरपाई न होने से भी प्रकृति नाराज है। ऊंचे पहाड़ी क्षेत्राें में वाहनों की गतिविधि सामान्य से अधिक बढ़ना भी पहाड़ों के स्वास्थ्य को खराब कर रहा है।
खेती और जल आपूर्ति के लिए सर्दियों की बर्फबारी बहुत जरूरी
कश्मीर में सर्दियों की बर्फबारी खेती, बागवानी और जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों के महीनों में लगातार सूखा रहने से घाटी में सिंचाई, पीने के पानी की सप्लाई और खेती की पैदावार पर दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ एजाज रसूल ने बताया कि कश्मीर में 60 से 70 प्रतिशत बाग बारिश पर निर्भर हैं और सर्दियों की बर्फबारी और उसके बाद वसंत की बारिश जरूरी है। बर्फबारी एक प्राकृतिक जलाशय के रूप में काम करती है। जब यह वसंत और गर्मियों के दौरान धीरे-धीरे पिघलती है तो यह फसलों, बागों और पीने के पानी के लिए लगातार पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करती है। पर्याप्त बर्फ जमा न होने या सर्दियों में भरपूर बारिश न होने की स्थिति में गर्मियों में पानी की कमी हो सकती है। पानी की कमी से धान जैसी ज्यादा पानी वाली फसलों पर भी असर पड़ेगा।