बताया जा रहा है कि लोड कैरियर को अस्पताल की ऊपरी मंजिलों तक ले जाया गया और वह उन कॉरिडोर से होकर गुजरा, जिनका इस्तेमाल मरीजों, तीमारदारों और मेडिकल स्टाफ की आवाजाही के लिए होता है।
अस्पताल में वाहन के इस तरह अंदर तक पहुंचने से मरीजों और तीमारदारों में भी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का सवाल है कि आखिर मरीजों के लिए बनाए गए रास्ते में लोड ले जाने वाले वाहन को प्रवेश की अनुमति कैसे मिली। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि कॉरिडोर में इस तरह के वाहन की आवाजाही से व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर आने-जाने वाले मरीजों को परेशानी हो सकती है। आपात स्थिति में यह व्यवस्था और भी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।
सामान पहुंचाने की व्यवस्था पर भी सवाल
इस घटना के बाद अस्पताल में सामान और उपकरणों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। मरीजों और तीमारदारों ने पूछा कि अस्पताल के पास सामान ढोने के लिए ट्रॉली, लिफ्ट या अन्य निर्धारित व्यवस्था होने के बावजूद थ्री-व्हीलर को मरीजों के लिए इस्तेमाल होने वाले कॉरिडोर तक क्यों लाया गया।
वहीं, यह सवाल भी उठ रहा है कि वाहन को अस्पताल भवन के अंदर ले जाने की अनुमति किसने दी और क्या अस्पताल प्रशासन के पास परिसर के भीतर वाहनों की आवाजाही को लेकर स्पष्ट नियम और सुरक्षा प्रोटोकॉल हैं। फिलहाल वायरल वीडियो ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों ने अस्पताल प्रशासन से मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि वाहन को अंदर आने की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई थी।