लेह से करीब 19 किलोमीटर दूर स्थित थिकसे मठ की स्थापना वर्ष 1433 में हुई थी। मठ में प्राचीन प्रतिमाएं, स्तूप, थंका चित्र और दीवारों पर बने ऐतिहासिक चित्र मौजूद हैं। यहां 1980 के दशक में स्थापित करीब 15 मीटर ऊंची मैत्रेय बुद्ध की प्रतिमा भी प्रमुख आकर्षण है।
थिकसे मठ में प्रतिदिन सुबह होने वाली प्रार्थना में बड़ी संख्या में लोग आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करने पहुंचते हैं। मठ से आसपास के पहाड़ी गांवों और पृष्ठभूमि में बहती सिंधु नदी का मनोरम दृश्य भी दिखाई देता है।
सर्जियो गोर गुरुवार को लेह पहुंचे थे। यह यात्रा 2020 के गलवान संघर्ष और भारत-चीन सीमा पर बने गतिरोध के बाद किसी शीर्ष अमेरिकी राजनयिक की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लद्दाख क्षेत्र की प्रमुख यात्राओं में से एक मानी जा रही है।
लद्दाख पहुंचने से पहले गोर ने कश्मीर घाटी में कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं और क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों से बातचीत की। श्रीनगर पहुंचने पर उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ मुलाकात के बाद गोर ने कहा था कि कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह उनकी पहली कश्मीर यात्रा है। उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत को बेहद गर्मजोशीपूर्ण बताते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीद जताई।
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि करीब 15 वर्षों बाद किसी मौजूदा अमेरिकी राजदूत और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के बीच इस स्तर की बैठक हुई। भारत और अमेरिका के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग सहित रणनीतिक संबंधों के बीच गोर की यह यात्रा दोनों देशों के बढ़ते सहयोग को भी रेखांकित करती है।