श्रीनगर/जम्मू। अभिनेता दिलीप कुमार के निधन से जम्मू-कश्मीर में भी शोक की लहर है। राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों ने शोक व्यक्त किया। सांसद डा. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि दिलीप कुमार का कश्मीर के लोगों से खास लगाव था, वह यहां के लोगों के लिए कुछ करना चाहते थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। अभिनेता दिलीप कुमार का कश्मीर के साथ केवल शूटिंग को लेकर कनेक्शन नहीं था, बल्कि उनकी पत्नी सायरा बानो भी कश्मीर में पलीं-बढ़ीं थीं। उनका परिवार श्रीनगर के राजबाग इलाके में रहता था। दिलीप कुमार के निधन पर पहलगाम के लोगों ने उन्हें याद किया, क्योंकि खून पसीना, जलजला, कर्मा आदि फिल्मों की शूटिंग उन्होंने पहलगाम में की थी।
कश्मीरी फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने भी दिलीप कुमार को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। कश्मीरी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने अभिनेता हसन जावेद ने कहा, यह बड़े दुख की बात है कि शहनशाह-ए-जज़्बात दिलीप कुमार हमारे बीच नहीं रहे। उनके बारे में बोलने के लिए शब्द नहीं हैं। आज की तारीख में भी उनकी फिल्में देखी जाती हैं, जिनमें उड़न खटोला, नया दौर आदि शामिल हैं। उनके निधन से इंडियन फिल्म इंडस्ट्री को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा है। अगर ‘एक्टर ऑफ मिलेनियम’ किसी को दिया जाना चाहिए तो वो दिलीप साहब ही हैं। उनकी जगह कोई नहीं ले नहीं सकता जोकि अपने आप में एक किताब है।
विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जहां दिलीप कुमार ने कई फिल्मों की शूटिंग की थी। आज भी वहां के लोग उन्हें याद करते हैं। स्थानीय निवासी मंजूर अहमद ने बताया कि जब दिलीप कुमार ने कर्मा फिल्म की शूटिंग की थी तब वे बहुत छोटे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें थोड़ा बहुत याद है कि जब वो यहां आते थे तो शूटिंग के बाद भी काफी समय तक यहां रुकते थे। उन्होंने कहा आज भी वे लोग उनकी कई फिल्में देखते हैं। उनके जैसा अभिनेता कहीं नहीं मिल पाएगा।
दिलीप साहब का कोई मुकाबला नहीं था : डॉ. फारूक
नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और एमपी डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि आज सुबह दिलीप कुमार के निधन की खबर सुनी तो बहुत दुख हुआ। वह बहुत नेक आदमी थे और फिल्म इंडस्ट्री और इंसानियत के लिहाज से उनका कोई मुकाबला नहीं था। उन्हें कश्मीर के लोगों के साथ बहुत लगाव था। वह कई बार यहां आए और हर बार कहते थे कि वह कश्मीर के लोगों के लिए कुछ करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। अल्लाह उन्हें जन्नत नसीब करे।