बलिदान का जीवंत प्रतीक...उत्सव सा रहा माहाैल
साधना दर्रे का नाम तब बदला गया था जब फिल्म मेरे महबूब की अभिनेत्री साधना अक्तूबर 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सैनिकों को जीत की बधाई देने के लिए यहां पहुंची थीं।वीरवार को यहां का माहौल उत्सव जैसा था। उपराज्यपाल का स्वागत करने के लिए आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। उपराज्यपाल ने इस परिसर को बलिदान का एक जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सीमा की रक्षा करने वाले जवानों और नागरिक आबादी के बीच की भावनात्मक दूरी को पाटा जाना चाहिए। चाहे तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश या केरल का कोई युवा हो जब वह इस मिट्टी पर खड़ा होगा तो उसे वीरता की वह भावना मिलेगी जो कोई किताब नहीं सिखा सकती।
जवानों से उच्च सतर्कता बनाए रखने के निर्देश
एलजी ने सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा, तंगधार एक रणनीतिक स्थान बना हुआ है जहां हमारा पड़ोसी लगातार नशीले पदार्थों की तस्करी की गतिविधियों को बढ़ाने का प्रयास करता रहता है। इस क्षेत्र में सेना द्वारा हवाई अड्डे जैसी सुविधा का विकास, नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ हमारे अभियान में एक महत्वपूर्ण संपत्ति के रूप में काम करेगा। पुलिस विभाग और सुरक्षा बल उच्चतम स्तर की सतर्कता बनाए रखें। कहा कि हमारी निगरानी इतनी पुख्ता होनी चाहिए कि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी अवैध नशीला पदार्थ हमारे क्षेत्र में प्रवेश न कर पाए।
तंगधार-करनाह के सात गांव वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में
एलजी ने बताया कि तंगधार-करनाह के सात गांवों को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत शामिल किया गया है। इससे इन गांवों में बेहतर बुनियादी ढांचा,आजीविका के अवसर और जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सकेगी। साधना टनल पूरे मौसम में आवागमन की सुविधा प्रदान कर व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा तथा आपदा राहत को सुगम बनाएगा। इससे क्षेत्र में कनेक्टिविटी, सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक बढ़ेंगी।