कर्फ्यू और हड़तालों ने कश्मीर पहुंचने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों पर रोक लगा दी है। अफजल गुरु को फांसी पर लटकाए जाने के बाद कश्मीर घाटी में खराब हुई स्थिति के बाद अब हुर्रियत कांफ्रेंस और कुछ दूसरे अलगाववादी संगठनों द्वारा उसके शव को परिवार को लौटाने की जिद ने यह हालात पैदा कर दिए हैं।
स्थिति यह हो चली है कि कश्मीर के एक बार पुन: दहक उठने से यहां के पर्यटक उद्योग को गहरे सकंट में डाल दिया है। सुधर रही आर्थिक स्थिति पर सकंट के बादल छाने लगे हैं और हालात जल्दी ही ठीक नहीं हुए तो कश्मीर आने की योजना बना रहे पर्यटकों का रुख किसी दूसरे राज्य की ओर मुड़ने से कोई नहीं रोक सकेगा।
कश्मीर के दिलकश मौसम को मानो नजर लग गई हो। मौसम तो मस्त है लेकिन मस्ती करने वाले कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। सर्दी के मौसम में हुए ताजे स्नो फॉल का मजा लूटने वालों में आई भारी गिरावट ने पर्यटक उद्योग से जुड़े कारोबारियों को गहरा धक्का पहुंचाया है। उनमें से अधिकतर के कमाने का एक मात्र साधन पर्यटक ही हैं, लेकिन पर्यटकों की कमी अभी से उनको खलने लगी।
वो कहते हैं कि यदि स्थिति में जल्दी बदलाव नहीं आया तो गर्मियों के दौरान लाखों पर्यटकों के यहां पहुंचने की उनकी आशाओं पर पानी फिर जाएगा। श्रीनगर स्थित डल झील कई दिनों से वीरान पड़ी हुई है, जबकि पहलगाम या गुलमर्ग जाकर ताजे स्नो फॉल में मजा करने वाले भी अब वहां नहीं पहुंच रहे हैं।
यदि गुलमर्ग पर्यटक स्थल के होटल मालिकों की बातों पर विश्वास किया जाए तो उनके होटलों की अधिकतर बुकिंग कश्मीर की वर्तमान स्थिति की भेंट चढ़ गई हैं। गुलमर्ग में वो ही पर्यटक पहुंच रहे हैं, जिन्होंने काफी पहले यहां के होटलों में बुकिंग करवा ली थी और किसी कारण वो रद्द नहीं हो सकी। गुलमर्ग की ओर जाने वाले वाहनों में गत कुछ दिनों से आई भारी गिरावट से यह अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि अब पर्यटक वहां भारी संख्या में नहीं पहुंच रहे हैं।