घोड़े वालों ने दिखाई बहादुरी, जान पर खेलकर बचाए पर्यटक
पहलगाम हमले के बाद घोड़े वाले आदिल और सज्जाद सहित अन्य कुछ टूरिस्ट गाइड की स्टोरी मीडिया में आई कि उन्होंने कैसे पर्यटकों की जान बचाई। उसके अलावा भी कई ऐसे युवा थे, जिन्होंने पर्यटकों को बायसरन घाटी से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। यह सब दर्शाता है कि कश्मीर में इंसानियत जिंदा है।पहलगाम के एक स्थानीय निवासी आदिल अहमद ने कहा कि जब हमले की खबर पहलगाम बाजार तक पहुंची तो अफरातफरी मच गई।
यह खबर भी पढ़ें: Pahalgam Attack: एक आदिल ने किया हमला तो....दूसरे आदिल ने पर्यटकों को बचाने के लिए अपने सीने पर खाई गोलियां
घायलों और रोते पर्यटकों को देख घबराए थे गाइड
हमें पुलिस ने मदद के लिए बुलाया और हम तुरंत बायसरन की ओर निकल पड़े। अंदाजा नहीं था कि आगे क्या हुआ है। वहां जो देखा, वह बयान करने लायक नहीं। रोते पर्यटक और खून में लथपथ कुछ घायलों को देखकर हम डर गए। हिम्मत जुटाकर बचाव कार्य शुरू किया।
मैंने दो लोगों को एंबुलेंस तक पहुंचाया। जेहन में सिर्फ यही था कि कैसे भी सबको सुरक्षित निकालना है, लेकिन यह समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है? कुछ देर बाद किसी ने कहा कि आतंकियों ने हमला किया है। आज भी दिल दुखी है और हम चाहते हैं कि जिन्होंने भी यह किया है, उसे फांसी दी जाए।
यह हमला इंसानियत का कत्ल है
एक अन्य स्थानीय मुनीर अहमद ने कहा कि यह हमला साफ तौर पर इंसानियत का कत्ल है। जिसने भी किया है, वह कश्मीर का दुश्मन है और यहां अमन-शांति नहीं देखना चाहता। आतंकियों ने धर्म पूछकर बेगुनाहों को निशाना बनाया। जिन कश्मीरियों ने घायलों को बचाया और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया, उन्होंने किसी की भी मदद धर्म पूछकर नहीं की। यह सभी को समझना होगा। मेरा भांजा पंजाब में पढ़ रहा था, जब हमने यह सुना तो उसे वापस आने के लिए कहा और फिलहाल वह घर पर ही है। अभी भेजने में डर लगता है।
यह खबर भी पढ़ें: Pahalgam: धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही जिंदगी; हमले के बाद खुलीं दुकानें, लौटे सैलानी; पहलगाम में उम्मीद की किरण