फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Leh-Ladakh: लद्दाख की मांगों को लेकर फिर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक, बोले- 'जान चली जाए, पीछे नहीं हटूंगा'

Mon, 29 Jun 2026 05:00 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, लेह

सार

सोनम वांगचुक ने लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत संरक्षण और लंबित मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
विज्ञापन
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान सोमवार को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों से किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं और केंद्र सरकार के साथ बातचीत भी ठप हो गई है, जिसके कारण उन्हें फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक - फोटो : PTI
मीडिया से बातचीत में वांगचुक ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें दोबारा धरने और अनशन पर बैठना पड़ेगा। मैं खुशी से अनशन नहीं कर रहा हूं। यह आसान नहीं है। मेरी जान भी चली जाए, तब भी मैं पीछे नहीं हटूंगा।

वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण राज्य का दर्जा और बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग का समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार के साथ हुई बैठकों से उम्मीद जगी थी लेकिन बातचीत के निष्कर्षों को औपचारिक रूप नहीं दिया गया जिससे लोगों का भरोसा कमजोर हुआ।

उन्होंने कहा कि सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से लोगों की चिंताओं को सुनना चाहिए और संसद में इन मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आंदोलन का समर्थन करने और भविष्य की पीढ़ियों के हित में सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की।

वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने का आग्रह करते हुए कहा कि विरोध में डर और नफरत की जगह संवाद और अहिंसा होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से जेल जाने के डर से भी नहीं घबराने की अपील की।

इस बीच जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन सोमवार को दसवें दिन भी जारी रहा। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत डिपके ने हाल के छात्र आत्महत्या मामलों का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि कम से कम सरकार को इन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए।

रविवार से शुरू हुई वांगचुक की भूख हड़ताल सोमवार को दूसरे दिन में प्रवेश कर गई। उन्होंने देशभर के लोगों से शिक्षा सुधार, जवाबदेही और पर्यावरण संरक्षण की मांगों के समर्थन में एक दिन का सांकेतिक उपवास रखने की अपील भी की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें