संसदीय परंपरा में विपक्ष को मिलता रहा है पद
संसदीय परंपरा के अनुसार डिप्टी स्पीकर का पद मुख्य विपक्षी दल को दिए जाने की परंपरा रही है। मौजूदा विधानसभा में भाजपा मुख्य विपक्षी दल है। इससे पहले पीडीपी-भाजपा सरकार में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नजीर गुरेजी और नेकां-कांग्रेस शासनकाल में पीडीपी के सरताज मदनी डिप्टी स्पीकर रह चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, नेकां डिप्टी स्पीकर का पद भाजपा को देने से हिचक रही है। दूसरी ओर, भाजपा ने भी अब तक इस मुद्दे को लेकर सरकार पर कोई औपचारिक दबाव नहीं बनाया है।
सत्ता पक्ष किसी भी सांविधानिक पद पर विपक्ष को बैठने नहीं देना चाहता
राजनीतिक विश्लेषक इनायत अहमद ने कहा कि पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय तक खाली नहीं रहता था। उनके अनुसार, नेकां ने जानबूझकर यह पद खाली रखा है। भाजपा भी दबाव नहीं बना सकती, क्योंकि खुद उसी ने 18वीं लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद खाली रखकर इस परंपरा की शुरुआत की थी। उनका कहना है कि इसी वजह से नेकां को भी अपने फैसले के लिए राजनीतिक तर्क मिल गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष किसी सांविधानिक पद पर विपक्ष को जगह नहीं देना चाहता। उनके मुताबिक, केंद्र में भाजपा द्वारा डिप्टी स्पीकर का पद खाली रखे जाने के बाद अब नेकां भी जम्मू-कश्मीर में उसी राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ा रही है।
सत्ता का बंटवारा नहीं चाहती नेकां, भाजपा
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में खाली डिप्टी स्पीकर के पद को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी विपक्ष, खासकर भाजपा से डरती है और सत्ता का बंटवारा नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार के अन्य मुद्दों पर जनता को केवल वादे मिले हैं, उसी तरह यह सांविधानिक पद भी खाली पड़ा है।
नेकां ने कहा- मुख्यमंत्री करेंगे फैसला
नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता इमरान नबी डार ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि डिप्टी स्पीकर का पद केवल विपक्ष को ही दिया जाए, ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है। उनके अनुसार, पद को भरने और इस संबंध में निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री के पास है और वही इस पर अंतिम फैसला करेंगे।