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आत्मसमर्पण करने वाला साकिब बोला-भविष्य में कुछ ऐसा नहीं करूंगा, जिससे सेना के फैसले पर सवाल उठे

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श्रीनगर। दक्षिणी कश्मीर के अवंतीपोरा में मुठभेड़ के दौरान सोमवार को आत्मसमर्पण करने वाले आतंकी साकिब अकबर ने कहा, वह भविष्य में ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे सेना को अपने इस फैसले पर पछतावा हो। साकिब को आत्मसमर्पण का मौका देने के लिए परिवार वालों ने सेना और पुलिस का शुक्रिया अदा किया।
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साकिब ने बताया कि वह पटियाला में बीटेक थर्ड ईयर का छात्र है, कोविड की वजह से वह घर लौट आया। 25 अगस्त को आतंकी बने उसके एक मित्र वारिस ने उससे संपर्क किया और आतंकवाद में शामिल होने को कहा। साकिब के मुताबिक 25 सितंबर को वह आतंकवादी के तौर पर सक्रिय हो गया।
साकिब के मुताबिक सोमवार को वह सेना की 42 राष्ट्रीय राइफल्स द्वारा की गई घेराबंदी में फंस गया, लेकिन 42 आरआर के सीओ ने उसे नई जिंदगी प्रदान कर जीने का मौका दिया। साकिब के परिवार वालों ने सेना और पुलिस के पेशेवर तरीके से ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए उनकी सरहाना की।
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पिता ने अदा किया सुरक्षाबलों का शुक्रिया
बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में साकिब के पिता मोहम्मद अकबर उसे गले लगाते समय बिलखते हुए कहते हैं कि तूने किस मुसीबत में डाला था। उठ गले लग अल्लाह ने तुझ से एक बार फिर मिलने का मौका दे दिया। हमने उम्मीद छोड़ दी थी। मेरा सहारा तुम ही थे। तुम्हारे लिए मैं नंगे पैर चलता था लेकिन तुम्हें कोई कमी नहीं होने दी। इतना ही इस विडियो में उसका भाई भी गले लगाता दिख रहा है। इस बीच एक पुलिस अधिकारी जब साकिब की मां के बारे में पूछता है तो पिता बताते हैं कि जबसे विक्टर फोर्स का फोन आया है वह बेहोश है।
हथियार और कपड़े छोड़कर आया बाहर
गौरतलब है कि सोमवार को नूरपोरा अवंतीपोरा में सेना की 42 आरआरए 130 बटालियन सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक इनपुट के आधार पर संयुक्त अभियान चलाया था। और इस दौरान आतंकियों को आत्मसमर्पण का मौका दिया गया परंतु आतंकी नहीं माने। एक आतंकी मुठभेड़ में मारा गया जबकि साकिब दूसरे घर में छुप गया । फिर सुरक्षाबलों ने उससे ेहथियार छोड़कर और कपड़े उतारकर बाहर आने को कहा। इसके बाद उसने आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन से संबंधित थे।
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