श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में इस वर्ष आतंकी घटनाओं में 8 भाजपा कार्यकर्ताओं समेत कुल 35 से अधिक स्थानीय लोगों की मौत हुई। भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के युवा मोर्चा के अध्यक्ष वसीम बारी, उसके भाई उमर शेख और पिता बशीर शेख के अलावा ओमपोरा बडगाम के अब्दुल हमीद नजार, कुलगाम जिले के भाजयुमो महासचिव फिदा हुसैन, वाईके पोरा के उमर रमजान और कुलगाम सोपट के हारून रशीद बेग शामिल हैं। दालवाशी बडगाम के बीडीसी चेयरमैन भूपेन्द्र सिंह की भी निर्मम हत्या की गई थी। इसके अलावा श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र खोंमुह के निसार अहमद उर्फ कोबरा को अगवा कर मारा गया था। उसका शव दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले के दंगम गांव से बरामद हुआ था। बताया जा रहा था कि वो भाजपा से संबंधित था लेकिन बाद में पार्टी ने इस बात को नकारा था।
वहीं कई स्थानीय लोग भी आतंकियों का निशाना बने। उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा में मुठभेड़ के दौरान आतंकियों की गोली लगने से एक मानसिक रोगी की मौत हो गई थी। दक्षिणी कश्मीर के बिजबिहाड़ा में आतंकियों द्वारा किए गए ग्रेनेड हमले में 4 वर्ष का निहान भट मारा गया। इस हमले में सीआरपीएफ़ की 90 बटालियन का एक जवान शाम लाल भी शहीद हुआ था।
आतंकियों ने त्राल पायीन के ग़ुलाम नबीमीर, रेडवानी बाला कुलगाम में एक ऑटो चालक महराजुदीन भट, तारीगाम कुलगाम में वसीम अहमद, रेडवानी कुलगाम में ग़ुलाम हसन वागे व सिराजुदीन गोरसी और लारकीपोरा में मोहम्मद सलीम डार को मौत के घाट उतारा था। पूर्व सैनिक बशीर अहमद को भी आतंकियों ने बछरू कुलगाम में गोली मारी थी। इसके अलावा कंगन पुलवामा में मानसिक रोगी आजाद अहमद की भी हत्या की थी। वहीं एडवोकेट बाबर कादरी को हवाल श्रीनगर में, पूर्व आतंकी तनवीर सोफी को रतनीपोरा पुलवामा में गोली मारी थी।
1989 से अब तक 5000 राजनीतिक कार्यकर्ता मारे जा चुके
बता दें, 1989 से शुरू हुए आतंकवाद के दौर से लेकर अब तक करीब 5000 राजनीतिक कार्यकर्ताओं को मौत हो चुकी है। सबसे पहली राजनीतिक हत्या 21 अगस्त, 1989 को श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में हुई थी, जब आतंकियों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता मोहम्मद यूसुफ हलवाई को गोली मारी। उसके पीछे कारण यह था कि उसने 15 अगस्त को घर की लाइट बंद करने से इंकार किया था। उस समय डॉ. फारूक अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे और जेकेएलएफ़ ने ‘ब्लैकआउट’ की कॉल दी थी। उसके बाद 13 सितंबर, 1989 को श्रीनगर के टीका लाल टपलू (भारतीय जनसंघ नेता) को आतंकियों ने गोली मारी थी। इसके अलावा कई पंचायती सदस्यों को भी निशाना बनाया जा चुका है।
पाकिस्तानी गोलाबारी में भी कई नागरिकों की जान गई
इसके अलावा कई स्थानीय नागरिक पाकिस्तान द्वारा की गई गोलाबारी में भी मारे गए। इनमें दो सेना के पोर्टर मोहम्मद असलम (28) और अलताफ़ हुसैन (23) शामिल हैं जोकि गुलपुर पुंछ के रहने वाले थे। करनाह कुपवाड़ा के धानी सदपोरा गांव के मोहम्मद सलीम (61), तुमाना गांव के जीशान बशीर, रेडी चौकीबल की शमीमा बेगम व जावेद खान, उड़ी बारामुला की अख्तर बेगम, पुंछ बालाकोट की रेशमा बीबी, रंगवार कुपवाड़ा के मोहम्मद आरिफ़, पुंछ के सादिक़ अहमद (65) और तंगधार के मोहम्मद यगूब मीर भी पाकिस्तानी गोलाबारी का निशाना बने।