मुझे पैसों की जरूरत नहीं। मेरा उद्देश्य अपनी संस्कृति को बचाए रखना है। हमारी परंपराएं व संस्कृति समाप्त हो रही है। केवल बीज बचे हुए हैं, जिन्हें फिर से अंकुरित किए जाने की आवश्यकता है। पद्मश्री सम्मान प्राप्त जागर गायिका बसंती बिष्ट का यह उद्बोधन गढ़वाल विवि के छात्रों में लोक संस्कृति के रंग भर गया।
बुधवार को प्रसिद्ध जागर गायिका व पद्मश्री सम्मान प्राप्त बसंती बिष्ट गढ़वाल विवि के वार्षिकोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि पहुंची थी। विवि के इतिहास में यह पहला मौका था जब विवि के वार्षिकोत्सव उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर कोई भी राजनैतिक व्यक्ति मौजूद नहीं था।
बसंती बिष्ट के पूरे उद्बोधन को छात्र बड़ी गंभीरता से सुनते रहे और बीच-बीच में तालियों की गड़गड़ाहट से बिष्ट की बात का समर्थन भी करते रहे। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति व परंपराएं समाज में विशिष्ट पहचान देती हैं। कहा कि संस्कृति को बचाए रखने में युवा अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कुलपति है राजा...
श्रीनगर। बसंती बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति को संवारने व संभालने में गढ़वाल विवि महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कुलपति प्रो. कौल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप तो राजा हैं। विवि में जो तय करेंगे वह होगा। आपके पास विद्या है और छात्रों के पास ऊर्जा।
जागर गाने से पूर्व उतारे जूते
श्रीनगर। बसंती बिष्ट ने मंच पर भी परंपराओं का पूरा निर्वहन किया। बिष्ट से जागर सुनाने का अनुरोध किया गया तो उन्होंने अपने जूते उतारे और फिर मंच पर जाकर जागर गाए।
जागरों पर जमकर झूमे छात्र
श्रीनगर। जैसे ही बसंती बिष्ट जागर गाना शुरू किया छात्र झूम उठे। छात्रों व शिक्षकों के अनुरोध पर बसंती बिष्ट ने कुमाऊंनी गीत भी गाया।