इस माह प्रदेश को 50 एमबीबीएस डॉक्टर मिल जाएंगे। उक्त डॉक्टरों की बेस अस्पताल में जेआरशिप (जूनियर रेजीडेंसी) पूरी हो रही है। 20 मार्च को साक्षात्कार के माध्यम से चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग चिकित्सकों को दूरस्थ सरकारी अस्पतालों में नियुक्ति दे देगा।
यहां बता दे कि राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों से रियायरती शुल्क (सब्सिडाइज्ड सीट) एमबीबीएस करने वाले चिकित्सकों को सरकारी अस्पतालों में निर्धारित अवधि तक अनिवार्य रुप से सेवा देनी पड़ती थी। शुरू में शासन ने बांडधारी चिकित्सकों के लिए 5 साल तक दुर्गम अस्पतालों में सेवा का नियम बनाया था, लेकिन वर्ष 2014 में इसमें संशोधन करते हुए 3 साल कर दिया गया। इसमें एक साल की जेआरशिप भी शामिल है।
इंटर्नशिप पूर्ण करने के पश्चात संबंधित चिकित्सक मेडिकल कालेज से संबद्ध अस्पताल में जेआर के पद पर कार्य करते हैं। राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध बेस अस्पताल में तैनात 50 जेआर निर्धारित एक साल का कार्यकाल पूर्ण कर चुके हैं।
संस्थान के प्राचार्य प्रो. चंद्रमोहन रावत ने बताया कि 20 मार्च को साक्षात्कार तय किया गया है। इसमें चिकित्सा महानिदेशालय के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे। उन्हीं के स्तर से जिलों को चिकित्सक आवंटित हो जाएंगे।
अब डेढ़ सौ डॉक्टरों की नियुक्ति
श्रीनगर। वर्ष 2008 में स्थापित मेडिकल कालेज से सरकार को अब तक 150 एमबीबीएस चिकित्सक मिल चुके हैं। वर्ष 2014 में 77 और वर्ष 2016 में 73 डॉक्टरों की नियुक्ति की गई। अब 50 और मिलने वाले हैं। हालांकि पूर्व में तैनात अधिकांश चिकित्सक कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात गायब हो गए।