संवाद न्यूज एजेंसी
कुपवाड़ा। काजियाबाद में मंगलवार को एक निजी स्कूल में संपत्ति विवाद ने हिंसक रूप ले लिया जिससे अधिकारियों को स्कूल को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। अधिकारियों ने कहा कि यह विवाद कुछ लोगों के बीच था लेकिन इसका असर छात्रों पर पड़ा। शिक्षा विभाग ने इसकी कड़ी निंदा की।
जिला शिक्षा योजना अधिकारी मोहम्मद इकबाल शाह ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मासूम बच्चे निजी संपत्ति संघर्ष के शिकार बन गए। उन्होंने इसमें शामिल लोगों की आलोचना की कि उन्होंने विवाद को स्कूल के वातावरण में फैलने दिया और कहा कि ऐसे मामले कैंपस के बाहर सुलझाए जाने चाहिए थे। घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों सहित डिप्टी सीईओ, जोनल शिक्षा अधिकारी, ज़ोनल शिक्षा योजना अधिकारी और क्लस्टर प्रमुख ने साइट का दौरा किया। अधिकारियों ने स्कूल के रिकॉर्ड सुरक्षित किए और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने कहा कि जब तक राजस्व रिकॉर्ड की जांच नहीं हो जाती और विवाद का समाधान नहीं हो जाता स्कूल बंद रहेगा।
विभाग ने पढ़ाई में बाधा न आए इसके लिए छात्रों को पास के सरकारी या निजी स्कूलों में अस्थायी प्रवेश लेने की अनुमति दी है। उन्होंने बच्चों के माता-पिता को इस अवधि के दौरान अपने बच्चों के लिए किसी भी स्कूल को चुनने की पूरी आजादी दी है। अधिकारियों ने कहा कि घटना के बाद छात्रों में संकट के संकेत दिखाई दिए। उन्हें परामर्श दिया गया और आश्वासन दिया गया कि उनकी शिक्षा बिना रुकावट जारी रहेगी। विभाग ने सभी पास के स्कूलों को निर्देश दिया है कि प्रभावित छात्रों को तुरंत शामिल किया जाए। परीक्षण प्रक्रिया में माता-पिता की सहायता के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
अधिकारियों ने कहा कि प्राइमरी, मिडिल और हाई स्कूल सहित सभी कक्षाओं के छात्र अपने नजदीकी संस्थानों में शामिल हो सकते हैं और अगले दिन से नियमित कक्षाओं में भाग ले सकते हैं। अधिकारी ने जोर दिया कि छात्रों की शिक्षा का एक भी पल बर्बाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने उन्हें समाज की नींव बताते हुए कहा कि विभाग बच्चों के अकादमिक भविष्य की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने यह भी बताया कि जिले के कई छात्रों ने इंजीनियरिंग और सिविल सर्विसेज सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है और माता-पिता से शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने की अपील की। अधिकारियों ने यह आश्वासन दिया कि अंतिम निर्णय लेने से पहले उच्च अधिकारियों से दिशा-निर्देश का पालन किया जाएगा जब विवाद सुलझ जाएगा।