- नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता ने उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की विरासत दमन, असंगति और राजनीतिक दोहरेपन से भरी है। यह जम्मू और कश्मीर में जनता के भरोसे को लगातार कम कर रही है। पीडीपी इन सबका जवाब देना चाहिए।
सादिक ने पार्टी मुख्यालय नवा-ए-सुबह से जारी एक बयान में कहा कि 2016 की अशांति के दौरान जब महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री थीं तो पीडीपी सरकार ने ऐसी कार्रवाई की जिसे हाल के इतिहास में बल का सबसे ज्यादा और अंधाधुंध इस्तेमाल कहा गया। आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ पहले 30 दिनों में ही लगभग 13 लाख पेलेट्स और लगभग 4,000 कारतूस चलाए गए जिससे लगभग 7,000 नागरिक घायल हो गए। इनमें से कई लोगों को जिंदगी भर के लिए गंभीर नतीजे भुगतने पड़े।
प्रशासन ने बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिया। उस दौरान कथित तौर पर लगभग 10,000 लोगों पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गईं। सादिक ने कहा, यह शासन नहीं था, यह घबराहट और जमीनी हकीकतों से पूरी तरह कटे होने के कारण अपनाई गई जबरदस्ती वाली राजनीति थी। पीडीपी के कामों में करुणा के बजाय नियंत्रण की सोच झलकती थी।
पार्टी की संस्थागत विश्वसनीयता पर निशाना साधते हुए सादिक ने जम्मू और कश्मीर विधानसभा में पेश किए गए एक हालिया आरटीआई खुलासे का जिक्र किया। इस खुलासे में सामने आया था कि पीडीपी राज्यसभा चुनाव के दौरान अपने पोलिंग एजेंट तैनात करने में नाकाम रही थी। उन्होंने इसे संगठनात्मक गिरावट और राजनीतिक गैर-गंभीरता का एक जीता-जागता उदाहरण बताया और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए।
ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला देते हुए सादिक ने हवाल घटना के बाद के हालात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने उस समय के राज्यपाल जगमोहन की सार्वजनिक रूप से तारीफ की थी जिसे उन्होंने उस समय की जनता की भावनाओं के बिल्कुल विपरीत बताया। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे फैसले पीडीपी के नेतृत्व में राजनीतिक दुविधा की लगातार बनी रहने वाली प्रवृत्ति को दिखाते हैं।