-नागरिक सचिवालय सहित कई इलाकों में जलभराव के बाद सीएम का बड़ा बयान, प्रोजेक्ट के थर्ड-पार्टी ऑडिट और पीड़ित लोगों को मुआवजे का दिया आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि श्रीनगर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की जांच कराई जाएगी। बीते दिनों हुई भारी बारिश के बाद शहर की जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी जिससे श्रीनगर के कई प्रमुख इलाकों और नागरिक सचिवालय परिसर में भारी जलभराव हो गया था।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लागू करने वाले लोगों से सवाल पूछे जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आपको उन लोगों से सवाल पूछने का मौका नहीं मिलता जिन्हें इसका जवाब देना चाहिए। जिन लोगों ने यहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट लाया और इसे लागू किया और जिनसे हमें इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का केवल 10 प्रतिशत काम विरासत में मिला। उनसे पूछा जाना चाहिए कि झेलम रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट को छोड़कर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का बाकी पैसा कहां गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने इस प्रोजेक्ट का थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने का निर्णय पहले ही ले लिया है, हालांकि उन्होंने इस बात पर खेद भी जताया कि इसका आदेश अभी तक जारी नहीं हो सका है। उन्होंने आगे कहा कि यह देखने के बाद कि प्रोजेक्ट का जो उद्देश्य था और जमीनी स्तर पर जो वास्तविक स्थिति है, उसमें काफी अंतर है, कैबिनेट ने अपनी पिछली बैठक में यह तय किया था कि प्रोजेक्ट की प्रभावशीलता की जांच के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट होना चाहिए। अभी तक थर्ड-पार्टी ऑडिट का आदेश जारी नहीं किया गया है।
उमर अब्दुल्ला ने हालांकि यह भी कहा कि सरकार श्रीनगर शहर की ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार के लिए अपने सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतनी पुरानी समस्या, जिसे वे लोग ठीक नहीं कर सके। उसे इतने कम समय में हल नहीं किया जा सकता। सोमवार को नागरिक सचिवालय के ग्राउंड फ्लोर में पानी भरने की घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे शर्मनाक करार दिया।
नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा
उन्होंने कहा कि यह कोई मामूली बात नहीं है। मौसम में सुधार होने दीजिए, हम इसकी पूरी जांच कराएंगे और उसके बाद सामूहिक कार्रवाई करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन लोगों को बारिश के कारण नुकसान पहुंचा है। उनके नुकसान का आकलन करने के बाद नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।