बड़ी उपलब्धि : अब खेतों में उग सकेगी महंगी ‘गुच्छी’ मशरूम
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कॉस्ट-कश्मीर) के वैज्ञानिकों ने दुनिया की सबसे महंगी जंगली मशरूम ‘गुच्छी’ (मोर्चेला) की खेती की तकनीक को सफलतापूर्वक विकसित कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता उस वैज्ञानिक चुनौती का समाधान है जिसने दशकों से वैश्विक शोध समुदाय को उलझाए रखा था।
मोर्चेला मशरूम, जिसे स्थानीय रूप से गुच्छी’ या ‘कंगिच’ कहा जाता है, अपने जटिल जीवन चक्र और विशेष पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण अब तक केवल जंगलों में प्राकृतिक रूप से ही उगती थी। इसकी खेती संभव न होने के कारण यह एक दुर्लभ वन उत्पाद बना हुआ था।
इस उपलब्धि के पीछे विश्वविद्यालय की दो अनुसंधान टीमों का योगदान है। बागवानी संकाय के डॉ. तारिक ए. सोफी और उनके पीएचडी छात्र कामरान मुनीर ने नियंत्रित ग्रीनहाउस में सफलता हासिल की, जबकि कृषि संकाय के डॉ. विकास गुप्ता ने खुले खेतों में इसकी खेती की तकनीक विकसित की।
गुच्छी मशरूम अपने अनोखे स्वाद और औषधीय गुणों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग में रहती है। इसकी कीमत 15,000 से 40,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचती है, जिससे यह दुनिया के सबसे अधिक मुनाफा देने वाले गैर-काष्ठ वन उत्पादों में शामिल है।
स्कॉसट-के के कुलपति नज़ीर अहमद गनई ने इस उपलब्धि को गेम-चेंजिंग बताते हुए कहा कि इससे गुच्छी को एक दुर्लभ वन संसाधन से बदलकर एक उच्च-मूल्य वाली कृषि फसल में परिवर्तित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे किसानों, ग्रामीण युवाओं और वन-निर्भर समुदायों के लिए आय के नए अवसर खुलेंगे, साथ ही हिमालयी वनों पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा।
विश्वविद्यालय अब इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत किसानों को प्रशिक्षण, प्रायोगिक प्रदर्शन और तकनीक हस्तांतरण के माध्यम से सक्षम बनाया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर बनेगा वैश्विक केंद्र
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से जम्मू-कश्मीर ‘खेती से उत्पादित गुच्छी’ का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन सकता है, जिससे कृषि-निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र को एक उच्च-मूल्य जैव-अर्थव्यवस्था हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।स्कॉसट-के के वैज्ञानिकों ने सबसे महंगी जंगली मशरूम गुच्छी की खेती की प्रक्रिया विकसित की यह नवाचार ''''गुच्छी को एक दुर्लभ वन संसाधन से बदलकर एक उच्च-मूल्य वाले कृषि उद्यम में तब्दील कर देगा।
-प्रो. नजीर अहमद गनई