- कश्मीर का इकलौता टर्शियरी केयर कैंसर सेंटर है स्किम्स सौरा
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। कश्मीर घाटी का इकलौता टर्शियरी केयर कैंसर ट्रीटमेंट सेंटर शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) सौरा में कई महत्वपूर्ण और उन्नत डायग्नोस्टिक टेस्टों का अभाव है। ये टेस्ट कैंसर की सटीक पहचान, स्टेजिंग और मॉनिटरिंग के लिए जरूरी हैं।
घाटी और आसपास के इलाकों से हजारों कैंसर मरीजों को सेवा देने के बावजूद स्किम्स में आधुनिक ऑन्कोलॉजी में स्टैंडर्ड माने जाने वाले कई आवश्यक जांच उपलब्ध नहीं हैं। नतीजतन, अधिकांश मरीजों को डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट के लिए जम्मू-कश्मीर के बाहर के अस्पतालों मुख्य रूप से दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई और अन्य महानगरों में जाना पड़ रहा है। कुछ मरीज यात्रा, ठहरने और प्राइवेट टेस्टिंग का खर्च कर पाते हैं लेकिन ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अधिकांश मरीज देरी या अधूरी ट्रीटमेंट के कारण पीड़ित हो रहे हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता एमएम शुजा से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्किम्स में कई महत्वपूर्ण जांच अनुपलब्ध हैं। इनमें बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के लिए एचएलए टाइपिंग, ट्रांसप्लांट की सफलता जांचने के लिए चिमेरिज्म टेस्टिंग, ट्रीटमेंट के बाद सूक्ष्म कैंसर सेल्स का पता लगाने के लिए मिनिमल रेजिडुअल डिजीज (एमआरडी) टेस्टिंग, स्पेसिफिक कैंसर सबटाइप्स की पहचान के लिए बोन मैरो बायोप्सी विद एक्सटेंडेड आईएचसी पैनल और कीमोथेरेपी मरीजों के लिए क्लोस्ट्रीडियम डिफिसाइल का स्टूल टेस्ट शामिल हैं।
अन्य अनुपलब्ध टेस्टों में साइटोमेगालोवायरस इंफेक्शन के लिए क्वांटिटेटिव सीएमवी पीसीआर, फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन की शुरुआती पहचान के लिए गैलक्टोमैनन और प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट, इम्यूनोसप्रेसिव और कीमोथेरेपी दवाओं के ड्रग लेवल मॉनिटरिंग, नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस), एफआईएसएच द्वारा साइटोजेनेटिक्स और कई विशेषीकृत मॉलिक्यूलर व साइटोजेनेटिक टेस्ट शामिल हैं।
ऑन्कोलॉजिस्ट्स का कहना है कि इन टेस्टों की कमी से डायग्नोसिस में देरी, गलत स्टेजिंग, ट्रीटमेंट रिस्पॉन्स की मॉनिटरिंग न कर पाना, रिलैप्स का बढ़ता खतरा और रोकथाम योग्य मौतें हो रही हैं। एक वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट ने कहा, आज कैंसर ट्रीटमेंट प्रिसिजन-बेस्ड है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स और जेनेटिक प्रोफाइलिंग के बिना हम अक्सर मरीजों का अंधाधुंध इलाज कर रहे हैं। जम्मू में एम्स जम्मू के संचालन से टेस्टिंग सुविधाओं में सुधार हुआ है लेकिन कश्मीर डायग्नोस्टिक गैप से प्रभावित है।
गरीब मरीज तो इलाज छोड़ देते हैं
दक्षिण कश्मीर के एक लिंफोमा मरीज ने बताया, मुझे सिर्फ टेस्टों के लिए दिल्ली रेफर किया गया, ट्रीटमेंट शुरू होने से पहले ही 1.5 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो गए। गरीब मरीज तो इलाज छोड़ देते हैं। इन कमियों के कारण घाटी के बाहर रेफरल्स में भारी बढ़ोतरी हुई है। कई मरीज जमीन, पशुधन बेचकर या कर्ज लेकर इलाज जारी रखते हैं जबकि अन्य आर्थिक कारणों से थेरेपी बीच में छोड़ देते हैं।