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रोशनी एक्ट को असांविधानिक घोषित करने से नहीं रुकेगी कार्रवाई : हाईकोर्ट

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि रोशनी एक्ट को असांविधानिक घोषित किए जाने से स्वतः ही लोक सेवकों और लाभार्थियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत कार्रवाई रुक नहीं जाती है।
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हालांकि अदालत ने उन मामलों में आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी जहां भ्रष्ट इरादे या अनुचित लाभ का कोई सबूत नहीं मिला। न्यायमूर्ति संजय धर की एकल पीठ ने 11 याचिकाओं के बैच पर फैसला देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि (अधिवासियों को स्वामित्व का हस्तांतरण) अधिनियम, 2001 (जिसे रोशनी एक्ट के नाम से जाना जाता है) को प्रो. एसके भल्ला बनाम जम्मू-कश्मीर राज्य मामले में डिवीजन बेंच द्वारा शुरू से ही शून्य घोषित किया गया था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पीसी एक्ट के तहत रिश्वत, पद का दुरुपयोग या साजिश जैसे अपराधों के लिए दंड से छूट मिल जाएगी।
अदालत ने स्पष्ट किया, रोशनी एक्ट को लागू करने के दौरान रिश्वत लेने वाला या अवैध लाभ प्राप्त करने वाला लोक सेवक इसलिए बरी नहीं हो सकता क्योंकि एक्ट असंवैधानिक घोषित हो गया। ऐसा कहना तर्कहीन और निरर्थक होगा। पीठ ने कहा कि भले ही प्रो. एसके भल्ला के फैसले के बाद लाभार्थियों को प्राप्त भूमि राज्य को वापस करनी पड़े लेकिन इससे अपराध की सजा से मुक्ति नहीं मिलती। यदि साक्ष्य से साबित होता है कि लोक सेवकों ने स्थिति का दुरुपयोग कर साजिश रचकर लाभार्थियों को अवैध लाभ दिया तो आपराधिक दायित्व बरकरार रहेगा। संवाद
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