रमजान के पहले जुमे को श्रीनगर की जामिया मस्जिद में दुआ मांगती महिलाएं। संवाद
- मीरवाइज ने चुनौतियों के बीच एकता, सब्र और नैतिक मूल्यों को फिर से बनाने की अपील की
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। रमजान के पवित्र महीने के पहले जुमे की नमाज ऐतिहासिक जामिया मस्जिद श्रीनगर में श्रद्धा के साथ पढ़ी गई। यहां हजारों नमाजियों जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, रूहानियत के माहौल में इबादत की।
इस दौरान मीरवाइज उमर फारूक ने रमजान को रूहानी तौर पर फिर से बनने और मिलकर सुधार करने का महीना बताया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक जामिया मस्जिद सदियों से कश्मीर के लोगों के लिए विश्वास, एकता, सब्र और मजबूती की निशानी रही है। यह पवित्र महीना इन हमेशा रहने वाले मूल्यों से फिर से जुड़ने का मौका देता है।
रमजान अनिश्चितता और मुश्किल समय में रहमत बनकर आता है। कुरान की आयत, ‘सच में, मुश्किल के साथ आसानी आती है’ (94:6) को कोट करते हुए उन्होंने लोगों से निराशा से दूर रहने और उम्मीद और विश्वास अपनाने की अपील की। मीरवाइज ने रोजे और दुआओं के कबूल होने, मुश्किल में फंसे लोगों को राहत, इलाके में स्थिरता और रमजान के मुबारक महीने में लोगों के बीच एकता की दुआ के साथ अपनी बात खत्म की।
उन्होंने यह भी बताया कि कल वह पैगंबर मुहम्मद की प्यारी बेटी, खातून-ए-जन्नत हजरत फातिमा के यौम-ए-विसाल के मौके पर अस्र की नमाज से पहले नक्शबंद साहिब दरगाह पर खुत्बा देंगे।