अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। रमजान के पवित्र महीने के आखिरी कुछ दिन ही बचे हैं और ऐसे में पूरे कश्मीर में खाने-पीने की जगहों पर स्पेशल इफ्तार प्लैटर और बुफे-स्टाइल खाने की मांग में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। इसके चलते पूरी घाटी में शाम के समय खाने की दुकानों और रेस्टोरेंट्स में काफी भीड़ देखने को मिलती है।
व्यस्त सड़क किनारे के स्टॉलों से लेकर आलीशान रेस्टोरेंट तक खाने की दुकानों ने रमजान के लिए खास मेनू पेश किए जा रहे हैं। इनमें पारंपरिक कश्मीरी पकवान शामिल हैं ताकि उन ग्राहकों को आकर्षित किया जा सके जो अपना रोजा घर के बाहर खोलना चाहते हैं। श्रीनगर और अन्य जिलों के कई रेस्टोरेंट ने खास इफ्तार थालियां पेश करना शुरू कर दिया है। इन थालियों में स्थानीय पसंदीदा चीज़ों का मिश्रण होता है, जैसे कबाब, खजूर, पारंपरिक ड्रिंक्स और मशहूर कश्मीरी वाजवान से प्रेरित व्यंजन। इसके अलावा कइयों ने तो उज़्बेकी, अफगानी, तुर्किश, अरबी, आदि व्यंजनों को भी प्लैटर में शामिल किया है ताकि युवा पीढ़ी को आकर्षित कर सकें।
रेस्टोरेंट मालिकों के अनुसार इस पहल को परिवारों और दोस्तों के समूहों से काफी उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है जो इस पवित्र महीने के दौरान एक साथ बैठकर खाना पसंद करते हैं। एक स्थानीय रेस्टोरेंट के मालिक सरदार नासिर अली खान ने कहा कि आज के दौर में परिवार घर से बाहर अच्छे पकवान खाना पसंद करते हैं इसलिए हमारी कोशिश रहती है कि स्थानीय और विदेशी व्यंजनों का मिश्रण कर अच्छे प्लैटर पेश करें। पहले पहले कश्मीर में लोग घरों में भी रोजा खोलना पसंद करते थे लेकिन अब सोच बदल रही है और जुबां भी अच्छे व्यंजन खाने के लिए उत्सुक होती है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह बढ़ता चलन घाटी में रमजान की बदलती संस्कृति को दर्शाता है जहां खाने के इर्द-गिर्द होने वाले सामाजिक मिलन-जुलन अब ज्यादा आम हो गए हैं। श्रीनगर के एक निवासी तौफीक अहमद ने कहा कि लोग अब इफ्तार के अलग-अलग विकल्पों को आजमाना और रेस्टोरेंट में अपने परिवार वालों, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ समय बिताना पसंद करते हैं। यह चलन सिर्फ ग्रीष्मकालीन राजधानी तक ही सीमित नहीं है बल्कि बारामुला, सोपोर, कुपवाड़ा और शोपियां आदि जैसे जिलों में भी रेस्टोरेंट और कैफे मालिकों ने कॉम्बो इफ्तार डील्स पेश की हैं। इनमें मिठाइयां, नाश्ता और मुख्य भोजन शामिल होते हैं जिससे शाम के समय यहां लगातार भीड़ लगी रहती है।
हालांकि कुछ निवासियों ने रमजान के दौरान खाने की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में एक सामान्य इफ्तार भोजन की कीमत बढ़ गई है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे कीमतों पर नजर रखें ताकि आम लोगों के लिए खाना किफायती बना रहे।