अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के विरोध में कश्मीर में दूसरे दिन किए गए प्रदर्शन में 6 सुरक्षाकर्मियों समेत कम से कम 14 लोग घायल हो गए।
अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर लोगों की आवाजाही रोकने के लिए पाबंदियां लगाई गई थीं। इसके अलावा सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने की घोषणा के साथ मोबाइल इंटरनेट स्पीड भी कम की गई थी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार कश्मीर घाटी में अलग-अलग जगहों पर 75 प्रदर्शन व रैलियां निकाली गईं। कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों को मजबूरन हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर शहर के बेमिना, गुंड हस्सी भट, सैदा कदल, निगीन, फोरशोर रोड और जहांगीर चौक के अलावा दक्षिण कश्मीर के पुलवामा, उत्तरी कश्मीर के लावेपोरा, नारबल, देलीना और मध्य कश्मीर के बडगाम के अलावा अन्य कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए।
इन सभी जगहों पर शिया लोगों की बड़ी आबादी है क्योंकि आंदोलनकारी सड़कों पर मार्च करते हुए अमेरिका और इस्राइल विरोधी नारे लगा रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे लेकिन कुछ जगहों पर झड़पें हुईं। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर पुलिस की ओर से काफी संयम बरता गया और यही कारण रहा कि कई जगहों पर प्रदर्शनकारी उनपर हावी हुए। जम्मू-कश्मीर पुलिस के छह जवान घायल हो गए। इसके अलावा करीब नाै प्रदर्शनकारियों के भी मामूली तौर पर घायल होने की भी खबर है।
गौरतलब है कि मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक के एक दिन के हड़ताल के आह्वान के बाद पूरी कश्मीर घाटी में लोगों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगा दी गईं। अधिकारियों ने बताया कि अधिकारियों ने लाल चौक पर घंटा घर को चारों ओर बैरिकेड लगाकर सील कर दिया था जबकि प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए शहर में बड़ी संख्या में पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया था।