बारामुला के सोपोर में प्रदर्शन के दौरान क्षतिग्रस्त किए गए वाहन। स्रोत पुलिस
- संपत्ति और वाहनों में की थी तोड़फोड़, 25 अन्य की पहचान, तलाशी जारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बारामुला। सोपोर में सोमवार को हुए छात्राओं के प्रदर्शन के दौरान उपद्रव करने, सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों की तोड़फोड़ करने के आरोप में पुलिस ने आठ युवकों को गिरफ्तार किया है। 25 अन्य की पहचान की गई है और उनकी तलाश जारी है।
बता दें कि एक छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोप में सोपोर में छात्राओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। आरोप स्कूल के ही लेक्चरर पर था। प्रदर्शन के दौरान कुछ युवकों ने उपद्रव किया था। अधिकारियों ने बताया कि सोपोर पुलिस ने रात भर चली कार्रवाई की एक शृंखला के दौरान उपद्रव के आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल में छात्राओं के विरोध प्रदर्शन में घुसपैठ की। कानून-व्यवस्था में बाधा डाली जिसमें तोड़फोड़ की घटनाएं भी शामिल हैं। इससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपियों ने अशांति भड़काकर और गैर-कानूनी गतिविधियों में लिप्त होकर स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने लक्षित अभियान चलाया। इसमें शामिल लोगों को धर दबोचा। 25 अन्य उपद्रवियों को भी जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।
पुलिस अधिकारियों ने इस स्थिति के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने में छात्राओं, अभिभावकों और जनता के सहयोग की सराहना भी की। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे ऐसे किसी भी तत्व के बारे में जानकारी साझा कर कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता करना जारी रखें।
आरोपी लेक्चरर को निलंबित कर दिया गया था
सोपोर के गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में सोमवार को छात्राओं ने प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि एक वरिष्ठ लेक्चरर ने उनकी एक सहपाठी के साथ यौन उत्पीड़न किया जिससे कैंपस में आक्रोश और दहशत फैल गई। दर्जनों छात्राओं ने कक्षाओं से निकलकर नारे लगाए और सख्त कार्रवाई की मांग की। हालात की गंभीरता को देखते हुए स्कूल शिक्षा निदेशालय कश्मीर ने उर्दू के सीनियर लेक्चरर आरोपी गुलाम हसन मीर को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। उन्हें गुरेज बांदीपोरा में बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल बदुगाम से अटैच कर दिया गया। संयुक्त निदेशक (उत्तर) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया और उन्हें 15 दिन के भीतर निदेशालय को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया।