- यह नवाचार सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली जियो कॉम्पोजिट सामग्री को अधिक मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बनाता है
श्रीनगर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर (एनआईटी श्रीनगर) ने सतत इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों को जिंक कोऑर्डिनेटेड पोर्फिरिन इंटीग्रेटेड जियो कॉम्पोजिट सिस्टम्स फॉर सस्टेनेबल पेवमेंट इंजीनियरिंग नामक नवाचार के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से पेटेंट प्रदान किया गया है।
यह पेटेंट सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. विवेक और केमिस्ट्री विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रवि कुमार के नेतृत्व में कार्यरत टीम को मिला है। टीम में पीएचडी स्कॉलर डॉ. वसीम आरिफ, अत्ता उल्लाह कलीम, किजाफा आफताब और मंजूर हुसैन शामिल रहे।
यह नवाचार सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली जियो कॉम्पोजिट सामग्री को अधिक मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बनाता है। विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर जैसे ठंडे क्षेत्रों में यह तकनीक सड़कों की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे सड़कों में दरारें और घिसाव (रटिंग) कम होंगे जिससे उनकी उम्र बढ़ेगी और रखरखाव लागत में कमी आएगी।
संस्थान के निदेशक प्रो. बिनोद कुमार कनौजिया ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई देते हुए इसे उच्च स्तरीय शोध और नवाचार का प्रतीक बताया। वहीं, रजिस्ट्रार प्रो. अतिकुर रहमान ने इसे संस्थान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया। डीन रिसर्च एंड कंसल्टेंसी प्रो. रूही नाज मीर के अनुसार, यह तकनीक आधुनिक सड़क निर्माण में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है और भविष्य में सतत इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को नई दिशा देगी। संवाद