अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से गठित टीम ने बुधवार को पुलवामा के जडूरा और बडगाम के चाडूरा स्थित कुलत्रेह में मिट्टी खनन स्थलों का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण कश्मीर घाटी में पर्यावरण को नुकसान और मिट्टी की क्षति के आरोप लगने के बाद किया गया।
इस संबंध में पर्यावरणविदों ने एनजीटी और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से संपर्क किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि बड़े पैमाने पर मिट्टी और रेत का खनन किया जा रहा है जिससे नाजुक करेवा परिदृश्य को नुकसान पहुंच रहा है। अधिकारियों ने बताया कि टीम ने खनन गतिविधियों से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए इन स्थलों का दौरा किया। इन गतिविधियों पर मिट्टी की गुणवत्ता खराब करने और प्राकृतिक भू-आकृतियों को बदलने के आरोप लगे हैं।
डॉ. राजा मुजफ्फर भट सहित कई पर्यावरणविदों ने चिंता जताई थी कि जम्मू-कश्मीर के बाहर स्थित एक कंपनी प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन में शामिल है जिससे वहां के परिदृश्य को स्पष्ट रूप से नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी गतिविधियों ने घाटी के कई हिस्सों को बदसूरत बना दिया है। उन्होंने सख्त नियामक कार्रवाई करने और उचित लैंडस्केपिंग के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों को फिर से संवारने की मांग की।
एनजीटी की टीम के साथ पुलवामा और बडगाम के जिला उपायुक्त भी मौजूद थे जिन्होंने निरीक्षण प्रक्रिया के दौरान दौरा करने वाले अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया। पर्यावरण विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई कि इस निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर जवाबदेही तय की जाएगी और सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। इन कदमों में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील करेवा क्षेत्रों में खनन गतिविधियों पर संभावित प्रतिबंध लगाना भी शामिल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त स्थलों को फिर से संवारने और पर्यावरण को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। निरीक्षण टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है।