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Srinagar News: सीमावर्ती जिलों में ड्रोन, माइक्रोकंट्रोलर व थ्रीडी प्रिंटिंग का पाठ पढ़ेंगे छात्र

Thu, 11 Dec 2025 01:18 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर
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सरकारी महिला कॉलेज को मिला 15 लाख का अनुदान
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कश्मीर के सीमावर्ती जिलों में मनोविज्ञान-संचालित एसटीएमएम शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल

श्रीनगर। सीमावर्ती जिलों में छात्र ड्रोन, माइक्रोकंट्रोलर और थ्री डी प्रिंटिंग का पाठ पढ़ेंगे। इसके लिए सरकारी महिला कॉलेज (जीसीडब्ल्यू) एमए रोड श्रीनगर को जम्मू और कश्मीर साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन काउंसिल (जेकेएसटीएंडआईसी) से कश्मीर के सीमावर्ती जिलों में एक नवाचार युक्त एसटीएमएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग एंड मैथमेटिक्स) शिक्षा पहल शुरू करने के लिए 15 लाख का दो साल का रिसर्च ग्रांट मिला है।
जानकारी के अनुसार जेकेएसटीएंडआईसी के स्पॉन्सर्ड रिसर्च एंड एक्सटेंशन प्रोग्राम 2025–26 के तहत मंजूर किए गए इस प्रोजेक्ट का नाम है कश्मीर के सीमावर्ती गांवों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए मनोविज्ञान-संचालित एसटीएमएम लर्निंग। इसका मकसद व्यावहारिक विज्ञान को हैंड्स-ऑन टेक्नोलॉजी लर्निंग के साथ मिलाकर बांदीपोरा (गुरेज सहित), कुपवाड़ा और बारामुला के छात्रों में वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देना है। इसमें श्रीनगर इस कार्यक्रम का पायलट हब होगा। इस पहल का नेतृत्व संयुक्त रूप से जीसीडब्ल्यू एमए रोड की मनोवैज्ञानिक विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर) डॉ. इशरत आरा और एनआईटी श्रीनगर के मैकेनिकल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिनेश कुमार राजेंद्रन कर रहे हैं।
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टीम ने बताया कि लगभग 120 शिक्षकों और छात्र मेंटर्स को इंटरेक्टिव एसटीईएम मॉड्यूल में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें ड्रोन बेसिक्स, माइक्रोकंट्रोलर, कम लागत वाले सेंसर और 3डी प्रिंटिंग शामिल हैं। डॉ. आरा ने कहा कि यह प्रोजेक्ट पॉप-अप इनोवेशन कैंप आयोजित करेगा इससे लगभग 600 छात्र सीधे तौर पर जुड़ेंगे और सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूलों में 6,000 से ज्यादा छात्रों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा होगा। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य आलोचनात्मक सोच और उद्देश्यपूर्ण इनोवेशन को बढ़ावा देकर कौशल के साथ-साथ सोच को भी प्रभावित करना है। वहीं डॉ. राजेंद्रन ने कहा कि यह कार्यक्रम दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों में आत्मविश्वास और लचीलापन बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा कि इनोवेशन तब शुरू होता है जब बच्चे बिना किसी डर के प्रयोग करते हैं। यह मॉडल उन्हें उपकरण और उनका सार्थक उपयोग करने का विश्वास दोनों प्रदान करता है। जीसीडब्ल्यू एमए रोड की प्रिंसिपल प्रोफेसर (डॉ.) यास्मीन फारूक ने कहा कि यह पहल संस्थान की 75वीं वर्षगांठ पूरी होने पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि जब व्यवहारिक विज्ञान शिक्षाशास्त्र को आकार देता है तो सीखना अधिक समावेशी और परिवर्तनकारी हो जाता है।
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