- न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने जिला न्यायालय परिसर श्रीनगर में दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का किया उद्घाटन
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर में शनिवार को विभिन्न राष्ट्रीय लोक अदालतों में 180 बेंचों ने 89,222 मामलों में से 83,623 का आपसी सहमति से निपटारा किया। इनमें मोटर एक्सीडेंट क्लेम, नागरिक, आपराधिक, श्रम विवाद, बिजली और पानी के बिल, जमीन अधिग्रहण, पारिवारिक मामले, चेक अस्वीकार और बैंक वसूली आदि मामलों में 42,09,04,185 रुपये की मुआवजा राशि शामिल थी।
जम्मू और कश्मीर कानूनी सेवा प्राधिकरण ने न्यायमूर्ति अरुण पल्ली, मुख्य न्यायाधीश जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय संरक्षक, जम्मू और कश्मीर कानूनी सेवा प्राधिकरण की संरक्षिता में न्यायमूर्ति संजीव कुमार कार्यकारी अध्यक्ष, जम्मू और कश्मीर कानूनी सेवा प्राधिकरण के गतिशील नेतृत्व और न्यायमूर्ति संजय धर, अध्यक्ष, उच्च न्यायालय कानूनी सेवा समिति की सक्षम मार्गदर्शन में दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की।
जिला न्यायालय परिसर श्रीनगर में न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन किया। न्यायमूर्ति संजीव कुमार का स्वागत हक नवाज जरगर, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (अध्यक्ष, डीएलएसए) श्रीनगर, शाजिया तबसीम और जिला न्यायपालिका के अन्य न्यायिक अधिकारियों ने किया। कार्यकारी अध्यक्ष ने लोक अदालत के लिए गठित विभिन्न बेंचों का निरीक्षण किया। अधिवक्ताओं, अध्यक्ष अधिकारियों, बेंच के सदस्यों के साथ बातचीत की। विभिन्न लीगल सर्विस संस्थाओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार जम्मू और कश्मीर में पूरे दिन चलने वाले राष्ट्रीय लोक अदालत में 180 बेंचों का गठन किया गया। 89,222 मामलों में से 83,623 का आपसी सहमति से निपटारा किया गया।
लोक अदालतों के महत्व को उजागर करते हुए जस्टिस संजय कुमार ने कहा कि लोक अदालतें वैकल्पिक विवाद समाधान के लिए एक प्रभावी तंत्र के रूप में कार्य करती हैं जो पक्षकारों को तेजी से और लागत-प्रभावी तरीके से विवादों को सौहार्दपूर्वक सुलझाने में सक्षम बनाती हैं। जिससे मामलों की लंबित संख्या घटती है और न्याय वितरण प्रणाली मजबूत होती है। उन्होंने मुकदमा पार्टियों से आग्रह किया कि वे इस तरह की पहलों का अधिकतम लाभ उठाएं और अपने विवादों का समाधान करें।
उन्होंने दोहराया कि जम्मू और कश्मीर विधिक सेवा प्राधिकरण वैकल्पिक विवाद निवारण की प्रक्रिया को मजबूत करना जारी रखेगा ताकि न्याय लोगों के दरवाजे तक पहुंचे, विशेष रूप से समाज के हाशिए पर और वंचित वर्गों तक। उन्होंने आगे बताया कि चालू कैलेंडर वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत 12 सितंबर, 2026 को आयोजित की जाएगी।