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संसद में जल निकायों के संरक्षण का मुद्दा उठाएं सांसद : डॉ. फारूक

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- नेकां अध्यक्ष ने सांसदों, विधायकों से जन-केंद्रित विकास को बढ़ावा देने का आग्रह किया
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को पार्टी के सांसदों से संसद में क्षेत्रीय जल निकायों और झीलों की सुरक्षा, बहाली और संरक्षण के महत्वपूर्ण मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने को कहा।
उन्होंने कहा कि झीलें, नदियां, आर्द्रभूमि और अन्य जल संसाधन अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक विरासत की जीवनरेखा हैं और उनका लगातार खराब होना आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक गंभीर खतरा है। अनियंत्रित शहरीकरण, प्रदूषण, अतिक्रमण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों ने प्रमुख झीलों और जल निकायों को बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने पार्टी के सांसदों से इन महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों को पुनर्जीवित करने और स्थायी रूप से प्रबंधित करने के लिए तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप, पर्याप्त बजटीय सहायता और एक व्यापक ढांचा बनाने की मांग की।
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उन्होंने कहा, जल निकायों की सुरक्षा न केवल पीने के पानी और सिंचाई के लिए बल्कि पर्यटन, जैव विविधता और जलवायु लचीलेपन के लिए भी आवश्यक है। किसी भी संरक्षण या विकास पहल में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आम जनता, विशेष रूप से जो लोग अपनी आजीविका के लिए जल निकायों पर निर्भर हैं, जैसे किसान, मछुआरे, कारीगर और पर्यटन से संबंधित श्रमिक, प्रतिकूल रूप से प्रभावित न हों।
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