- धार्मिक नेताओं ने कहा-नफरत फैलाने वालों से रहें सतर्क, सहाबा और अहल-ए-बैत का सम्मान जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलमा के संरक्षक मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मौलवी मुहम्मद उमर फारूक के निर्देश पर रविवार को अंजुमन औकाफ जामा मस्जिद श्रीनगर में शिया-सुन्नी कॉआडिनेशन कमेटी की अहम बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता आगा सैयद मुजतबा ने की। इसमें कई बड़े आलिम, धार्मिक नेता और तंजीमों के सदस्य शामिल हुए।
बैठक में कहा गया कि मुस्लिम उम्माह को आज कई चुनौतियों का सामना है। ऐसे में आपसी एकता, इज्जत और समझदारी बहुत जरूरी है। सभी ने माना कि मुहर्रम का महीना पाक है और इस दौरान भाईचारे का माहौल बिगाड़ने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में पिछले साल मुहर्रम के दौरान सोशल मीडिया पर आई कुछ पोस्ट पर चिंता जताई गई, जिनसे गलतफहमी फैली थी। धार्मिक तंजीमों और लोगों से कहा गया कि वे सार्वजनिक बातचीत और ऑनलाइन पोस्ट में जिम्मेदारी और संयम बरतें।
बैठक में सभी ने दोहराया कि पैगंबर मुहम्मद के सहाबा और अहल-ए-बैत का पूरा सम्मान होना चाहिए। भड़काऊ या नफरत फैलाने वाली बातें इस्लाम और एकता के खिलाफ हैं। बैठक में एमएमयू के बैनर तले एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा गया। यह कमेटी मुहर्रम के दौरान सतर्क रहेगी और नफरत फैलाने वालों की कोशिशों को रोकेगी। बैठक में आगा सैयद मुजतबा ने एमएमयू और मीरवाइज-ए-कश्मीर के शिया-सुन्नी एकता के लिए किए जा रहे कामों की तारीफ की।
इस दौरान मौलाना शौकत हुसैन केंग, आगा सैयद मोहम्मद यूसुफ, सैयद आदिल मुर्तजा, सैयद मोहसिन रिजवी, मौलाना बिलाल अहमद हाजी, मुफ्ती गुलाम रसूल समून, सिब्त मोहम्मद शब्बीर कुम्मी, सैयद परवेज सफवी, मोहम्मद अल्ताफ मुन्तजिर आदि मौजूद रहे।