- कश्मीर के उलेमाओं से रमजान को एकता और सामाजिक सुधार के लिए इस्तेमाल करने का आह्वान
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। कश्मीर के मीरवाइज डॉ. मौलवी मुहम्मद उमर फारूक ने रविवार को बडगाम में इस्तेकबाल-ए-रमजान सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान आला सैयद हसन अल-मूसवी और मौफती नसीर-उल-इस्लाम सहित प्रमुख उलेमा, इमाम और खातिब शामिल थे।
मीरवाइज ने कहा कि पवित्र रमजान का महीना धार्मिक विद्वानों और उपदेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। इस पवित्र महीने में लोग विशेष रूप से युवा बड़ी संख्या में मस्जिदों में आते हैं। इस दौरान उलेमा युवाओं को अल्लाह के साथ संबंध मजबूत करने, चरित्र निर्माण, नैतिक सुधार और उम्माह के भीतर एकता को बढ़ावा देने का संदेश दें। उन्होंने उलेमाओं से आग्रह किया कि वे सामाजिक मुद्दों को बुद्धिमानी और करुणा के साथ संबोधित करें समाज को सुधार, जिम्मेदारी और आपसी सम्मान की दिशा में मार्गदर्शन करें।
उन्होंने कहा, रमजान ऐसे समय में आ रहा है जब मुस्लिम समुदाय दुनिया भर में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। फिलिस्तीन में लगातार हो रही अन्याय की घटनाओं और ईरान तथा यमन की कठिन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में मुसलमानों की पीड़ा को अत्यंत दुखद बताया।
मीरवाइज ने मस्जिदों की प्रोफाइलिंग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की और इसे धार्मिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताया। उन्होंने अन्य सहभागी उलेमाओं के साथ मिलकर ऐसे कार्य तुरंत बंद करने और धार्मिक संस्थाओं को स्वतंत्र और गरिमापूर्ण ढंग से काम करने की अनुमति देने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी उम्मीद व्यक्त की कि इस पवित्र महीने के दौरान धार्मिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा और प्रशासन लोगों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान और संरक्षण करेगा, विशेष रूप से यह सुनिश्चित करेगा कि ऐतिहासिक जामा मस्जिद श्रीनगर सहित पूजा स्थल बिना किसी बाधा के कार्य करें।