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Srinagar News: फंसे हुए भारतीय छात्रों को आर्मेनिया के रास्ते निकलने का मिला विकल्प

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- कई छात्र अब भी ईरान और सीमा चौकियों पर फंसे हैं, परिवार वालों ने जल्द और समन्वित मदद की लगाई गुहार
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। ईरान में तनावपूर्ण हालात के बीच चल रही निकासी की चुनौतियों के बीच एक अहम घटनाक्रम में अजरबैजान सीमा पर फंसे भारतीय छात्रों को अब आर्मेनिया के रास्ते निकलने का विकल्प दिया गया है। यह उन छात्रों के लिए एक संभावित राहत की बात है जिन्हें लंबे समय से देरी का सामना करना पड़ रहा था।

मिली जानकारी के अनुसार लगभग 150 से अधिक भारतीय छात्र अभी भी अजरबैजान सीमा पर खासकर अस्तारा क्षेत्र में फंसे हुए हैं। यहां अनिवार्य एग्जिट कोड जारी होने में हो रही देरी के कारण वे लगभग एक सप्ताह से अनिश्चितता की स्थिति में हैं।
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निकासी के प्रयासों में जुटे अधिकारियों और समन्वयकों ने अब फंसे हुए छात्रों को आर्मेनिया के रास्ते एक वैकल्पिक मार्ग पर विचार करने की सलाह दी है। इस व्यवस्था के तहत छात्रों को आर्मेनिया पहुंचने पर ही वीजा मिलने की उम्मीद है। हालांकि सीमा पार करने के बाद उन्हें भारत वापस आने के लिए अपने यात्रा टिकटों की व्यवस्था और बुकिंग खुद ही करनी होगी। प्रभावित छात्रों में से बड़ी संख्या इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी और ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज से हैं।

इस बीच निकासी के प्रयासों को आंशिक सफलता मिली है। लगभग 200-300 छात्र पहले ही आर्मेनिया पहुंच चुके हैं जहां से उम्मीद है कि वे अगले कुछ दिनों में भारत लौट आएंगे। यह उड़ानों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। इनमें से कई छात्र फिलहाल अपनी उड़ानों के पक्के शेड्यूल का इंतज़ार कर रहे हैं क्योंकि एयरलाइंस अभी भी सीमित लेकिन नियमित सेवाएं संचालित कर रही हैं।

हालांकि अन्य छात्रों के लिए स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। लगभग 400 छात्र अभी भी ईरान के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं और चल रही निकासी प्रक्रिया के तहत आर्मेनिया जाने के लिए परिवहन का इंतज़ार कर रहे हैं। अधिकारी जल्द से जल्द उनकी आवाजाही को सुगम बनाने के लिए काम कर रहे हैं।

कई प्रमुख संस्थानों जिनमें तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज और उर्मिया यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज शामिल हैं, के कई छात्र पहले ही सुरक्षित रूप से भारत लौटने में सफल रहे हैं।
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आल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएमएसए) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि निकासी में मदद के लिए उड़ानें रोजाना संचालित की जा रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अजरबैजान सीमा की तुलना में आर्मेनिया का रास्ता अब तक अपेक्षाकृत अधिक सुगम साबित हुआ है जबकि अजरबैजान सीमा पर प्रक्रियागत देरी के कारण आवाजाही में लगातार बाधाएं आ रही हैं। गौरतलब है कि फंसे हुए छात्रों के माता-पिता ने अपनी बढ़ती चिंता जाहिर की है और भारत सरकार व संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे उनके बच्चों की सुरक्षित और जल्द वापसी सुनिश्चित करने के लिए और अधिक सक्रियता से हस्तक्षेप करें।
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