- जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने श्रीनगर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अभिभावकों से की मुलाकात
- सेना की सद्भावना स्कॉलरशिप का मकसद कश्मीरी युवाओं को सशक्त बनाना था न कि उनके भविष्य को अनिश्चितता में डालना : नासिर
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को श्रीनगर में प्रदर्शन कर रहे उन छात्रों से मुलाकात की जो राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग प्रोग्राम में नामांकित हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इन्हें भरोसा दिलाया कि कोर्स की मान्यता, निलंबन और एफआईआर के मामलों को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष उठाया जाएगा।
इन छात्रों और इनके अभिभावकों ने श्रीनगर में प्रदर्शन करते हुए चिंता जताई थी कि इस कोर्स को मान्यता प्राप्त नहीं है और कैंपस में विरोध प्रदर्शन के बाद छात्रों को हिरासत में ले लिया गया था। जेकेएसए के राज्य अध्यक्ष मुबशिर अहमद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने इन छात्रों के परिवारों की शिकायतें सुनीं। एसोसिएशन ने छात्रों और अभिभावकों को आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करेगा। उनके सामने इस मामले को उठाएगा। ऐसा इसलिए किया जाएगा क्योंकि प्रभावित छात्रों में से कई ने सेना के सद्भावना आउटरीच कार्यक्रम से जुड़ी शैक्षिक पहल के तहत दाखिला लिया था जिसका उद्देश्य जम्मू और कश्मीर के छात्रों को सहायता प्रदान करना है।
मुबशिर ने कहा कि इस मुद्दे ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग प्रोग्राम की पढ़ाई कर रहे 50 से अधिक कश्मीरी छात्रों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। कई छात्र अपने चार साल के कोर्स के अंतिम चरण में हैं और अपने आखिरी सेमेस्टर की ओर बढ़ रहे हैं। छात्रों ने इस प्रोग्राम में यह विश्वास कर दाखिला लिया था कि इसे देश में नर्सिंग शिक्षा और पेशेवर पंजीकरण को नियंत्रित करने वाले नियामक निकायों भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) और राजस्थान नर्सिंग परिषद (आरएनसी)से आवश्यक वैधानिक अनुमोदन प्राप्त हैं।
हालांकि हाल ही में तब गंभीर चिंताएं सामने आईं जब छात्रों को कथित तौर पर पता चला कि इस प्रोग्राम के पास आईएनसी और आरएनसी से अनिवार्य अनुमोदन नहीं हैं। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि उनकी डिग्री को नर्सिंग क्षेत्र में पेशेवर पंजीकरण और रोजगार के लिए मान्यता नहीं मिल सकती है।
जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने कहा कि छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से संपर्क करके स्पष्टीकरण मांगा था और कोर्स की मान्यता की स्थिति की पुष्टि करने वाले आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था लेकिन छात्रों की शिकायतें दूर करने के बजाय यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले 17 कश्मीरी छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी।
छात्रों में अलगाव की भावना पैदा हो गई है
इसके अलावा यूनिवर्सिटी ने 33 कश्मीरी छात्रों को निलंबित कर दिया जिससे प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों में चिंता और परेशानी और भी बढ़ गई। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सेना की सद्भावना पहल से जुड़ा था। उसका मकसद शिक्षा के जरिए कश्मीरी युवाओं को जोड़ना, उन्हें सशक्त बनाना और उनका सहयोग करना था। इसके विपरीत उनपर एफआईआर दर्ज कर और छात्रों को हिरासत में लेकर और निलंबित कर छात्रों और उनके परिवारों में परेशानी और अलगाव की भावना पैदा हो गई है।