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डायलिसिस मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है फंड रोकना : एसोसिएशन

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- कहा, सरकार की ओर से आयुष्मान फंड रोके जाने से डायलिसिस केंद्र बंद होने की कगार पर
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर भर में डायलिसिस केंद्र एक अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं और आयुष्मान भारत-सेहत योजना के तहत भारी मात्रा में भुगतान बकाया होने के कारण बंद होने की कगार पर हैं।
जम्मू और कश्मीर प्राइवेट हॉस्पिटल और डायलिसिस सेंटर एसोसिएशन के महासचिव डॉ. मसूद उल हसन ने कहा, राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की ओर से सैकड़ों करोड़ रुपये के वैध बकाये का भुगतान वर्षों से नहीं किया गया है, जिनमें से कुछ बिल 2021 से ही लंबित हैं। इस वित्तीय संकट के कारण, केंद्र अब डायलाइजर, ट्यूबिंग सेट और दवाइयों जैसी जरूरी डायलिसिस सामग्री खरीदने में भी असमर्थ हैं। कई इकाइयों में तो डॉक्टरों, तकनीशियनों और नर्सिंग स्टाफ को वेतन देने के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।
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डायलिसिस एक जीवन रक्षक सेवा है। एक भी सत्र छूट जाना गुर्दे के मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। फिर भी, निजी डायलिसिस केंद्रों को, जो 70% से अधिक गोल्डन कार्ड मरीजों का इलाज करते हैं, अब सामग्री खरीदने या कर्मचारियों को वेतन देने में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अब दोनों ही विकल्प संभव नहीं रह गए हैं।
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जम्मू-कश्मीर में कार्यान्वयन का मौजूदा ट्रस्ट मोड पूरी तरह से विफल हो गया है। इंश्योरेंस मोड के विपरीत, इसमें भुगतान के लिए कोई जवाबदेही या निश्चित समय सीमा नहीं है। बिलों का भुगतान न होने के कारण विक्रेताओं ने आपूर्ति रोक दी है, और प्रशिक्षित कर्मचारी इस्तीफ़ा दे रहे हैं। यदि फंड तुरंत जारी नहीं किए गए तो हमारे पास सेवाओं को निलंबित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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