श्रीनगर। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने लोगों से अपनी पहचान को परिभाषित करने वाली भाषाओं को संजोने, उनकी रक्षा करने और गर्व से बोलने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, मातृभाषा केवल संचार का माध्यम नहीं है यह संस्कृति का दिल है। स्मृति का पालना है और हम कौन हैं, इसका आईना है। उन्होंने मातृभाषाओं को स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा माध्यम बनाने का आह्वान किया, खासकर बच्चे के प्रारंभिक वर्षों में, जहां भाषा विचार, कल्पना और संबंध को आकार देती है।
कश्मीरी भाषा की शाश्वत भव्यता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. फारूक ने इसकी चमकदार विरासत, शास्त्रीय छंदों, रहस्यमयी कविता, लोक गीतों और सदियों से कवियों, संतों, वाग्मियों और भाषाविदों द्वारा रचित विद्वतापूर्ण कार्यों का जिक्र किया। उन्होंने इसे सामूहिक ज्ञान और कलात्मक प्रतिभा के जीवंत अभिलेखागार के रूप में वर्णित किया। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं जैसे डोगरी, पहाड़ी, गोजरी, पंजाबी और शिना की सुरक्षा और प्रचार का भी समर्थन किया। संवाद