नालसा का दूरदराज के अंतिम नागरिक तक न्याय पहुंचाने का कार्य
पिछले 35 वर्षों में कश्मीर की स्थिति का स्पष्ट रूप से उल्लेख करते हुए, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कुछ विसंगतियां रही हैं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है। न्याधीशों और वकीलों के बीच यह संवाद एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगा।
नालसा को यह सुनिश्चित करने का अपना कार्य जारी रखना चाहिए कि देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्र के अंतिम निवासी को संविधान में निहित न्याय मिले।उन्होंने कहा, "देश के संविधान के माध्यम से, हमने खुद से न्याय का वादा किया है, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक। हमारा दायित्व है कि न्याय को उसकी सच्ची भावना के अनुसार लागू किया जाए। कानूनी बिरादरी को संविधान के सच्चे मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध होना चाहिए।
बाबासाहेब बीआर अंबेडकर ने एक व्यक्ति, एक वोट के माध्यम से राजनीतिक न्याय स्थापित किया, वहीं सामाजिक विभाजन और एक विभाजन से दूसरे विभाजन में जाने की कठिनाई के बारे में भी बात की।
यहां का सूफीवाद संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देता है
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की अपनी पिछली यात्राओं को याद करते हुए, मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि उन्हें दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों से अपार प्रेम और स्नेह मिला है। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं अपने गृहनगर आ गया हूं।
मुझ पर बरसाए गए सभी प्रेम और स्नेह के लिए मैं आभारी हूंं। मैं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी हिस्सों में गया हूं। यहां की सूफीवाद की परंपरा भारत के संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देती है। सभी धर्मों के लोग यहां दरगाहों, मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों पर आते हैं।