-असिस्टेंट लाइब्रेरियन डॉ. शेख मोहम्मद इमरान के आईयूएसटी में सेवा अधिकार और कश्मीर विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद पर सुनाया फैसला
अदालत से लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण द्वारा इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी अवंतिपोरा के कुलपति प्रो. शकील अहमद रोमशू के खिलाफ अवमानना मामले में जारी गैर-जमानती वारंट के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने कुलपति प्रो. रोमशू द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया। यह पूरा मामला विश्वविद्यालय के असिस्टेंट लाइब्रेरियन डॉ. शेख मोहम्मद इमरान के सेवा अधिकारों और उनकी लीन से जुड़ा हुआ है।
तीन महीने में मूल याचिका का निपटारा करे कैट
खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मूल विवाद अभी भी केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के समक्ष लंबित है और उस पर अंतिम न्यायिक फैसला आना बाकी है। अदालत ने कैट को निर्देश दिया कि वह दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए अगले तीन महीनों के भीतर लंबित मूल आवेदन पर अंतिम फैसला सुनाए। साथ ही दोनों पक्षों को न्यायाधिकरण की सुनवाई प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करने का आदेश दिया गया।
अदालत को सूचित किया गया कि डॉ. शेख मोहम्मद इमरान ने कैट के 14 सितंबर के आदेश के अनुपालन में 22 सितंबर को कश्मीर विश्वविद्यालय (केयू) में असिस्टेंट लाइब्रेरियन के रूप में कार्यभार संभाल लिया था और वे वर्तमान में वहीं अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ. इमरान के वकील फैजान मजीद भट ने दलील दी कि उनके मुवक्किल द्वारा कश्मीर विवि में कार्यभार संभालना बाद का घटनाक्रम है, इसलिए कैट का अंतिम फैसला आने तक उनके सेवा अधिकारों को संरक्षित किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए डॉ. इमरान को फिलहाल कश्मीर विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं जारी रखने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि इस्लामिक यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरियन पद से जुड़ा उनका सेवा अधिकार कैट की मूल याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन सुरक्षित रहेगा।