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Srinagar News: 46 साल पुराने मामले में हाईकोर्ट ने महिला की सजा कम की

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शमीमा ने अपनी सास पर कुल्हाड़ी से हमला किया था
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने 46 साल पुराने एक हत्या मामले में सोमवार को 70 वर्षीय महिला की सजा कम कर दी। महिला पहले ही जेल की सजा काट चुकी है। कोर्ट ने उसकी उम्र और खराब सेहत को राहत का आधार बनाया।
हाईकोर्ट ने इस मामले को न्यायिक प्रणाली में देरी का उदाहरण बताया। मामला 10 जुलाई 1979 का है। ट्रायल को 30 साल लगे। फैसला 2009 में आया। अपील को निपटने में 16 साल और लगे। जस्टिस संजय परिहार की बेंच ने यह फैसला सुनाया। मामला उड़ी निवासी शमीमा बेगम का था। कोर्ट ने दोषसिद्धि बरकरार रखी है लेकिन सजा कम कर दी है। अब शमीमा को पांच साल की कठोर कैद की सजा नहीं काटनी होगी। उसकी सजा जेल में बिताए गए समय तक सीमित कर दी गई है। जुर्माना बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है।
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कोर्ट ने कहा कि यह अपराध पूर्व सोचा हुआ नहीं था। यह घरेलू झगड़े में गुस्से की वजह से हुआ। आरोपी महिला गरीब पृष्ठभूमि से है। वह उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित है। उसकी आंखों की रोशनी भी कमजोर है। मामला 1979 का है। आरोप है कि शमीमा ने अपनी सास पर कुल्हाड़ी से हमला किया था। उस समय पति की दादी ने बीच-बचाव किया तो उन पर भी वार कर दिया। झगड़ा खेत की सिंचाई को लेकर हुआ था।
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महिला को 1979 में गिरफ्तार किया गया था। उसे उसी साल जमानत मिल गई। 2009 में दोषी ठहराए जाने के बाद उसे फिर हिरासत में लिया गया। लेकिन हाईकोर्ट ने जुलाई 2009 में ही उसे जमानत दे दी।
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