-मौसम की मार और विपरीत परिस्थितियों के बीच गुज्जर-बाकरवाल समुदायों का पारंपरिक प्रवास जारी
- दूरदराज के इलाकों में मोबाइल मेडिकल कैंप लगाने की उठी मांग
अमृतपाल सिंह बाली/मुजम्मिल याकूब
शोपियां। जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी और जंगली इलाकों में मौसम की बेरुखी और बर्फबारी के बावजूद, खानाबदोश समुदायों का हौसला कम नहीं है। इस साल पीर पंजाल क्षेत्र और मुगल रोड पर लगातार हुई बारिश और बर्फबारी के कारण वार्षिक प्रवास में थोड़ी देरी जरूर हुई लेकिन तमाम दिक्कतों को पार कर बड़ी संख्या में गुज्जर और बाकरवाल समुदाय के परिवार सुरक्षित कश्मीर घाटी पहुंच चुके हैं।
यह पारंपरिक प्रवास इन समुदायों की जीविका का मुख्य आधार है जो अपने पूरे परिवार, मवेशियों और वफादार शिकारी कुत्तों के साथ दुर्गम रास्तों से होते हुए गर्मियों के मौसम में कश्मीर के जंगलों और लद्दाख के इलाकों की ओर बढ़ते हैं।
आमतौर पर ये खानाबदोश परिवार मार्च और अप्रैल के महीने में घाटी में प्रवेश करना शुरू कर देते हैं। इस साल मुगल रोड पर भारी बर्फबारी के कारण मवेशियों और संपत्ति के नुकसान से बचने के लिए कई परिवारों ने अपनी यात्रा को कुछ समय के लिए टाल दिया था।
लेकिन जैसे ही मौसम में सुधार हुआ, इन परिवारों ने अपनी यात्रा दोबारा शुरू की। अप्रैल के आखिरी हफ्ते और पूरे मई महीने के दौरान बड़ी संख्या में डेरे कश्मीर घाटी पहुंच चुके हैं जबकि बाकी बचे समूह जून की शुरुआत तक अपनी मंजिलों (जैसे पहलगाम के जंगल और लद्दाख) तक पहुंच जाएंगे।
सफर के दौरान सरकार द्वारा किए गए इंतजामों को लेकर समुदाय के बुजुर्गों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कुछ सुधारों की गुंजाइश अभी भी बाकी है। एक बुजुर्ग खानाबदोश, बजराहत बरकत ने कहा कि खराब मौसम और रास्तों पर बर्फ होने की वजह से कई परिवारों ने देरी से सफर शुरू किया ताकि कोई नुकसान न हो। प्रशासन ने हमारे लिए परिवहन सुविधाएं और मोबाइल मेडिकल कैंप की व्यवस्था की है, जो कि एक बेहतरीन कदम है लेकिन दूरदराज के इलाकों में रहने वाले कई लोगों को अब भी यह नहीं पता कि ये सुविधाएं कहां उपलब्ध हैं और इनका लाभ कैसे उठाना है। इसलिए जागरूकता की जरूरत है।
इस बीच खानाबदोश परिवारों ने प्रशासन से अपील की है कि दुर्गम रास्तों पर सूचना तंत्र को और मजबूत किया जाए ताकि आखिरी कतार में चल रहे व्यक्ति तक भी सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंच सके। इसके साथ ही उन्होंने पीर की गली और अन्य ऊंचाई वाले पहाड़ी रास्तों पर और अधिक मोबाइल मेडिकल कैंप स्थापित करने की मांग की है। बुजुर्गों का कहना है कि कठिन रास्तों और बदलते मौसम में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए सफर के दौरान ही तुरंत चिकित्सा मिलना बेहद जरूरी है। ब्यूरो/संवाद