संवाद न्यूज एजेंसी
गांदरबल। ग्रामीण विकास विभाग कश्मीर ने स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत गांदरबल जिले के पाथरीबल गुंड क्षेत्र में 25,000 लीटर क्षमता वाले सामुदायिक बायोगैस प्लांट के निर्माण की शुरुआत की है।
अधिकारियों के अनुसार, 35 लाख रुपये की अनुमानित लागत वाला यह प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक जिले में एक-एक सामुदायिक बायोगैस प्लांट स्थापित करने की केंद्र शासित प्रदेश स्तर की पहल का हिस्सा है। गांदरबल में बन रहा यह प्लांट कश्मीर घाटी का अपनी तरह का पहला संचालित होने वाला बायोगैस प्लांट माना जा रहा है जो विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और ग्रामीण कचरा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह प्लांट एनारोबिक डाइजेशन (ऑक्सीजन रहित प्रक्रिया) पर आधारित होगा जिसमें स्थानीय समुदाय से रोटेशन के आधार पर एकत्रित पशुओं के गोबर का उपयोग किया जाएगा। सूक्ष्मजीवों की ओर से अपघटन की इस प्रक्रिया से मीथेन युक्त बायोगैस और जैविक स्लरी तैयार होगी। उत्पादित बायोगैस का उपयोग लगभग 10 घरों की रसोई ईंधन जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा, जबकि स्लरी को कृषि कार्यों के लिए पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
क्षेत्र की जलवायु चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डाइजेस्टर में थर्मोस्टेटिक कंट्रोल सिस्टम लगाया जा रहा है, ताकि सूक्ष्मजीवों की सक्रियता के लिए आवश्यक तापमान बनाए रखा जा सके। इसके अलावा, गैस प्रेशर, तापमान, पीएच स्तर और फीडस्टॉक की रियल टाइम निगरानी के लिए सेंसर भी लगाए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना एलपीजी और जलाऊ लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ पशु अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान का बेहतर विकल्प प्रदान करेगी। यह पहल अनियंत्रित कचरे से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को कम करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में भी सहायक होगी।
प्लांट के संचालन के लिए सामुदायिक भागीदारी मॉडल तैयार किया गया है, जिसमें स्थानीय परिवार और डेयरी किसान फीडस्टॉक उपलब्ध कराएंगे। संचालन, रखरखाव और बायोगैस के समान वितरण के लिए एक यूजर ग्रुप कमेटी भी गठित की जाएगी।