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शहर-ए-खास के लिए अलग से हो बजट का प्रावधान : महबूबा

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श्रीनगर के डाउनटाउन में आयोजित कथ बात के दौरान बुजुर्ग व्य​क्ति की बात सुनतीं महबूबा मुफ्ती। सं - फोटो : शहर के बेलीगंज स्थित एक दुकान में रविवार को लैपटॉप पर बजट देखते युवा।
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- श्रीनगर के डाउनटाउन में किया कथ बात कार्यक्रम, पुराने शहर को बताया शहर-ए-खास
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र से ठीक पहले पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखी है। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि बजट में श्रीनगर के पुराने शहर यानी शहर-ए-खास के विकास के लिए अलग से प्रावधान किया जाना चाहिए।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के संबोधन के साथ सोमवार से बजट सत्र शुरू हो रहा है। 6 फरवरी को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बजट पेश करेंगे। इससे पहले रविवार को श्रीनगर के डाउनटाउन में कथबात कार्यक्रम के दौरान महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पुराने शहर के लोग मशीनी दौर में पिछड़ रहे हैं और सरकारी नौकरियों में आरक्षण न होने के कारण वे हाशिए पर हैं।
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शहर-ए-खास में रहने वाले ज्यादातर लोग सामान्य वर्ग से आते हैं। उन्हें सरकारी नौकरियों या शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलता जिससे वे पिछड़ रहे हैं। यहां के लोग या तो पर्यटन पर निर्भर हैं या हस्तशिल्प पर। मशीनों से बने उत्पाद हाथ के कारीगरों की कमर तोड़ रहे हैं। उनकी आय घट गई है इसलिए इनके लिए अलग बजट बेहद जरूरी है। वहीं उन्होंने केंद्रीय बजट पर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।
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जेन जी की तारीफ की
महबूबा ने कथ बात में आए युवाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि जेन जी (उन लोगों को कहा जाता है जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है) ने यह साबित कर दिया है कि उन्हें विभिन्न मुद्दों की जानकारी है जो पिछली पीढ़ियों के पास शायद नहीं थी। संवादात्मक सत्र को मीडिया से दूर रखा गया क्योंकि लोग कैमरों की मौजूदगी में खुलकर बोलने से कतराते हैं। वे इस बात से डरते हैं कि अगर वे अपने दिल की बात कहेंगे तो उन्हें सरकार से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दुर्भाग्य से सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी अंकुश लगाना चाहती है।
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