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युवाओं को नशे के नुकसान बताएं इमाम और धार्मिक विद्वान : डिवकॉम

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- मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोसाइंसेज संस्थान में मस्जिदों के इमामों और धार्मिक विद्वानों के लिए लगी कार्यशाला
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नशे को समाप्त करने में धार्मिक विद्वानों की भूमिका को उजागर करने के लिए प्रशासन ने मानसिक स्वास्थ्य व न्यूरोसाइंसेज संस्थान में मस्जिदों के इमामों और धार्मिक विद्वानों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की। इस मौके पर डिविजनल कमिश्नर (डिवकॉम) अंशुल गर्ग ने कहा कि इमाम और धार्मिक विद्वान युवाओं को नशे के नुकसान बताएं।
डिवकॉम ने नशे के इस्तेमाल में वृद्धि को रोकने के लिए तीन स्तरीय दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करने में धार्मिक विद्वानों और मस्जिद के इमामों की अहम भूमिका है। अंशुल गर्ग कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे जबकि श्रीनगर के उपायुक्त डीसी अक्षय लाबरू विशेष मेहमान के रूप में शामिल हुए। इस कार्यशाला में घाटी भर के 100 से अधिक प्रमुख धार्मिक विद्वानों सहित इमाम और उलमा के साथ-साथ बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों और स्थानीय लोगों ने भाग लिया।
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इस मौके पर जीएमसी श्रीनगर के प्रिंसिपल इफ्फत हसन, प्रशासनिक अधिकारी मोहम्मद हकाक, एडीसी श्रीनगर आदिल फरीद, तहसीलदार खानयार सैयद शाहिद, तहसीलदार वक्फ बोर्ड इश्तियाक अहमद, नोडल आफिसर एटीएफ आईएमएचएएएनएस डॉ. अरशिद, इंचार्ज ड्रग डि-एडिक्शन सेंटर एसएमएचएस अस्पताल डॉ. यासीर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। कार्यशाला को संबोधित करते हुए डिविजनल कमिश्नर ने धार्मिक विद्वानों से लोगों व खासतौर पर युवाओं को नशे से होने वाले नुकसान व हानिकारक प्रभावों के बारे में संवेदनशील बनाने में सक्रिय समर्थन और सहयोग की अपील की।
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शुक्रवार को होने वाली नमाज के माध्यम से दें संदेश
उन्होंने विद्वानों से आग्रह किया कि वे शुक्रवार को होने वाली नमाज के माध्यम से यह संदेश दें कि नशा सभी धर्मों में नशे का सेवन केवल निषिद्ध ही नहीं है बल्कि यह परिवारों और समाज पर भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग और संस्थाएं मामलों में वृद्धि को रोकने के लिए तीन स्तरीय दृष्टिकोण अपनाएंगी जिसमें जागरूकता अभियान, पीड़ितों की पहचान और परामर्श शामिल हैं। उन्होंने नशे के मामलों की समय पर रिपोर्टिंग के महत्व पर भी जोर दिया और प्रभावित लोगों और उनके परिवारों से लगातार परामर्श और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के माध्यम से समय पर पुनर्वास के लिए ड्रग डि-एडिक्शन सेंटर से संपर्क करने का आग्रह किया।
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